पंजाब सीएम के कैंप ऑफिस पर सीबीआई रेड को केजरीवाल ने भाजपा की बौखलाहट बताया
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप ऑफिस पर सीबीआई की छापेमारी के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है। आम आदमी पार्टी ने इसे भाजपा की चुनावी साजिश बताया है तो वहीं सीबीआई ने हाईकोर्ट के निर्देश पर एफआईआर और तलाशी की पुष्टि की।;
नई दिल्ली/चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप ऑफिस पर सीबीआई की छापेमारी के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है। आम आदमी पार्टी ने इसे भाजपा की चुनावी साजिश बताया है तो वहीं सीबीआई ने हाईकोर्ट के निर्देश पर एफआईआर और तलाशी की पुष्टि की।
आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "चुनाव से दो महीने पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय पर सीबीआई की रेड भाजपा की बौखलाहट का नतीजा है। जब से सेंटर में भाजपा की सरकार आई है उसने पंजाबियों के साथ हमेशा ही धोखा किया है, चाहे किसान आंदोलन हो, पंजाब के पानी का मुद्दा हो या पंजाब यूनिवर्सिटी का मुद्दा हो और अब तो उनके चुने हुए मुख्यमंत्री के साथ भी धोखा कर रही है।"
उन्होंने कहा, "भाजपा चुनाव लड़कर पंजाब में जीत नहीं सकती तो ईडी-सीबीआई के सहारे चुनाव लड़ना चाहती है लेकिन पंजाबियों ने अपना मन बना लिया है और भाजपा के सीबीआई रेड का जवाब आने वाले चुनाव में भगवंत मान को 100 से अधिक सीटों से जिताकर देंगे।"
इससे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी 'एक्स' पर लिखा, "भाजपा ने पंजाब चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। मेरे कैंप ऑफिस पर सीबीआई का छापा पड़ा। अब पंजाब सरकार और मुझे बदनाम करने के लिए पंजाब में ईडी और सीबीआई का गलत इस्तेमाल किया जाएगा। लोगों से मुझे मिल रहे प्यार से भाजपा घबरा गई है।"
दूसरी ओर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी कार्रवाई पर आधिकारिक जानकारी दी है। सीबीआई सूचना विभाग की ओर से जारी बयान के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों और ईडी से मिली रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने पंजाब के मुख्यमंत्री के ओएसडी और उनके सहयोगियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए एफआईआर दर्ज की है।
आरोपों में पैसे के बदले अधिकारियों (आईएएस और आईपीएस सहित) की पोस्टिंग, विभागीय कार्यवाही, नीति बनाने, प्रशासनिक मंजूरी, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, संपत्ति के विवाद और राजस्व व जमीन से जुड़े मामलों में हेरफेर और प्रभाव डालना शामिल है। आरोपी सरकारी कर्मचारियों ने सरकारी आदेश और नीतियां जारी होने से पहले ही उनके ड्राफ्ट निजी व्यक्तियों को उपलब्ध कराए थे।