सपा के 34 साल के सफर में काम कम, कांड-कारनामे ज्यादा: पंकज चौधरी

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए उसके 34 वर्ष के राजनीतिक सफर पर सवाल खड़े किए;

Update: 2026-10-04 18:15 GMT

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने रविवार को समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए उसके 34 वर्ष के राजनीतिक सफर पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लोहिया के आदर्शों के नाम पर राजनीति शुरू करने वाली सपा की तीन सरकारों के कार्यकाल को देखें तो विकास और सुशासन से ज्यादा विवाद, भ्रष्टाचार, भर्ती घोटाले, कानून-व्यवस्था और परिवारवाद के आरोप सामने आते हैं।

चौधरी ने कहा कि अब सपा के राजनीतिक रिकॉर्ड का हिसाब जनता के सामने है।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में समाजवादी पार्टी के 34 वर्षों के राजनीतिक सफर पर सिलसिलेवार हमला बोला। उन्होंने सपा सरकारों से जुड़े विभिन्न विवादों और मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने भले ही डॉ. राम मनोहर लोहिया के आदर्शों के नाम पर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की हो, लेकिन उसके शासनकाल में काम से ज्यादा कांड-कारनामे चर्चा में रहे।

चौधरी ने सपा के राजनीतिक सफर की शुरुआत से ही गंभीर विवाद जुड़े होने का आरोप लगाते हुए 1994 के रामपुर तिराहा कांड और 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर कार्रवाई और महिलाओं के साथ कथित अभद्रता की घटनाओं ने सपा की राजनीतिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

उन्होंने 2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद की सरकार पर भी निशाना साधा। चौधरी ने आरोप लगाया कि सत्ता का केंद्र परिवार के भीतर रहा। उन्होंने डिंपल यादव के निर्विरोध निर्वाचन, मुख्यमंत्री के पास बड़ी संख्या में विभाग रहने और बिजली आपूर्ति में कथित वीआईपी संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में सपा कार्यकर्ताओं के थानों और प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप के आरोप भी सामने आते रहे।

यादव सिंह प्रकरण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मामले में सीबीआई जांच और संपत्तियों की जांच हुई। उन्होंने 2012 से 2017 के बीच यश भारती पुरस्कारों के वितरण पर भी सवाल उठाते हुए इसमें पारदर्शिता और निर्धारित प्रक्रिया के पालन को लेकर आरोप लगाए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का उल्लेख करते हुए तत्कालीन सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हिंसा में 60 से अधिक लोगों की मौत और 50 हजार से अधिक लोगों के विस्थापन की बात सामने आई थी।

उन्होंने सहारनपुर दंगे और तत्कालीन मंत्री आजम खान की भूमिका को लेकर भी सपा सरकार पर निशाना साधा। चौधरी ने सपा सरकार की मुफ्त लैपटॉप योजना और बेरोजगारी भत्ते को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि करीब 15 लाख लैपटॉप की खरीद के बावजूद लगभग छह लाख ही वितरित किए गए। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी भत्ते के नाम पर 20.58 करोड़ रुपये बांटे गए, जबकि प्रचार पर 15.06 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि युवाओं के नाम पर योजना बनाना अलग बात है और उसका पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाना अलग।

उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में भर्ती और अध्यक्ष की नियुक्ति से जुड़े विवाद, स्वतंत्र पत्रकारों के उत्पीड़न तथा दलित लेखक कंवल भारती की गिरफ्तारी का उल्लेख करते हुए कहा कि सपा शासन में सरकार की आलोचना करने वालों के साथ व्यवहार को लेकर भी गंभीर सवाल उठे।

किसानों के मुद्दे पर चौधरी ने कहा कि 2013 से 2016 के बीच गन्ना किसानों के राज्य परामर्श मूल्य को लेकर सरकार की नीति सवालों के घेरे में रही। उन्होंने दावा किया कि तीन वर्षों तक यह 280 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर रहा और गन्ना ब्याज माफी के मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद किसानों को राहत मिली।

उन्होंने जेपीएनआईसी परियोजना को लेकर भी सपा सरकार पर हमला बोला। चौधरी ने आरोप लगाया कि 265 करोड़ रुपये की परियोजना की लागत बढ़कर 865 करोड़ रुपये तक पहुंच गई और 821 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी परियोजना अधूरी रही। उन्होंने नियमों और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का भी आरोप लगाया। महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर

भाजपा नेता ने बदायूं कांड, कैराना पलायन और पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर तत्कालीन सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

चौधरी ने 72,825 शिक्षक भर्ती, 2015-16 में दलित उत्पीड़न के मामलों और 2016 के जल निगम भर्ती प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि सपा शासन में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता और प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों ने युवाओं के अधिकारों और अवसरों के साथ अन्याय की तस्वीर सामने रखी। उन्होंने सपा की राजनीतिक गठजोड़ की नीति पर भी हमला बोला।

चौधरी ने 2016 में मुख्तार अंसारी से जुड़ी पार्टी के साथ गठबंधन की कोशिश, 2014 में यादव परिवार के सदस्यों का सपा की पांचों लोकसभा सीटों से निर्वाचित होना और 2017 में कांग्रेस के साथ गठबंधन का उल्लेख करते हुए इसे परिवारवाद और अवसरवादी राजनीति का उदाहरण बताया।

प्रेस वार्ता के दौरान चौधरी ने प्रतीकात्मक रूप से ‘सपा के पाप का घड़ा’ फोड़ा। उन्होंने कहा कि सपा के 34 वर्षों के राजनीतिक रिकॉर्ड में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, भर्ती, किसान, महिला सुरक्षा और परिवारवाद से जुड़े सवालों का जवाब जनता के सामने होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सुशासन, कानून का राज, विकास, गरीबों और युवाओं के हित तथा पारदर्शी व्यवस्था के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अब विकास, सुशासन और कानून के राज को प्राथमिकता दे रही है और सपा को अपने राजनीतिक सफर का हिसाब जनता के सामने देना होगा।

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