नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज में 77वां गणतंत्र दिवस समारोह गरिमामय और प्रेरणादायी वातावरण में मनाया गया। यह आयोजन केवल राष्ट्रीय पर्व के औपचारिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय संविधान की मूल भावना न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को युवाओं तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम में संविधान को लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए उसके महत्व, प्रासंगिकता और नागरिक कर्तव्यों पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य अतिथि का संबोधन
समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विकास सिंह रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा संविधान में निहित है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत दस्तावेज है, जो देश की विविधता, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती प्रदान करता है। डॉ. सिंह ने कहा, “न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व भारतीय संविधान के चार मजबूत स्तंभ हैं। इन्हीं के आधार पर हमारा लोकतंत्र खड़ा है। संविधान नागरिकों को अधिकार देता है, लेकिन उतनी ही स्पष्टता से उनके कर्तव्यों को भी परिभाषित करता है।”
युवाओं की भूमिका पर जोर
डॉ. विकास सिंह ने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान की रक्षा और उसके मूल्यों को जीवित रखना नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी गंभीरता से निभाते हैं। उन्होंने कहा, “आज के युवा ही कल के नीति-निर्माता हैं। अगर युवा संविधान की भावना को समझेंगे और उसे अपने आचरण में उतारेंगे, तभी भारत एक सशक्त और समावेशी राष्ट्र बन पाएगा।”
केवल उत्सव नहीं, आत्ममंथन का अवसर
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर भी बल दिया कि गणतंत्र दिवस केवल झंडारोहण और परेड का दिन नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन का अवसर भी है। यह दिन नागरिकों को यह याद दिलाता है कि भारत में शासन की सर्वोच्च शक्ति जनता के पास है और संविधान उसी शक्ति का आधार है। कॉलेज प्रशासन की ओर से कहा गया कि इस वर्ष का आयोजन विशेष रूप से छात्रों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह के दौरान छात्राओं ने विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम को जीवंत और भावनात्मक बना दिया। देशभक्ति गीत, समूह नृत्य और संगीत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष रूप से छात्रा अलैया की सुमधुर संगीत प्रस्तुति ने सभी का दिल जीत लिया। उसकी आवाज़ और भावपूर्ण गायन ने देशभक्ति की भावना को और प्रगाढ़ कर दिया। सभागार तालियों की गूंज से भर उठा।
शैक्षणिक समुदाय की सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर कॉलेज का पूरा शैक्षणिक समुदाय एक साथ नजर आया। उप-प्राचार्य प्रो. प्रीति मल्होत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल अकादमिक ज्ञान देना नहीं है, बल्कि छात्रों को जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। उन्होंने कहा, “संविधान की समझ और लोकतांत्रिक मूल्यों की शिक्षा आज के समय में अत्यंत आवश्यक है। ऐसे आयोजन छात्रों को अपने देश और समाज के प्रति सजग बनाते हैं।”
शिक्षकों और आयोजकों की भूमिका
कार्यक्रम में प्रो. पद्मश्री मुद्गल, कार्यक्रम संयोजिका डॉ. पूजा खन्ना, एनसीसी प्रमुख डॉ. सुपर्णा जैन सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे छात्रों के लिए प्रेरणादायी बताया। डॉ. पूजा खन्ना ने बताया कि कार्यक्रम की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई थी कि छात्र न केवल गणतंत्र दिवस मनाएं, बल्कि संविधान के मूल विचारों को समझें और आत्मसात करें।
एनसीसी कैडेट्स की उपस्थिति से बढ़ी गरिमा
कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स की अनुशासित उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया। कैडेट्स ने राष्ट्रसेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया, जो संविधान की भावना के अनुरूप है।
छात्रों में दिखा उत्साह और गर्व
समारोह के दौरान छात्रों में विशेष उत्साह और गर्व देखने को मिला। कई छात्रों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें संविधान और लोकतंत्र को लेकर नई समझ देते हैं। छात्रों का मानना था कि इस आयोजन ने उन्हें केवल दर्शक नहीं, बल्कि जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।
संविधान की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प
समारोह का समापन संविधान की प्रस्तावना के मूल आदर्शों को याद करते हुए किया गया। सभी ने देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम दौलत राम कॉलेज में न केवल एक औपचारिक आयोजन रहा, बल्कि यह छात्रों के लिए संविधान की आत्मा को समझने और उसे अपने जीवन में अपनाने का एक सार्थक प्रयास साबित हुआ।