'मुझे किडनैप किया गया': ध्रुव राठी का नया वीडियो आया सामने, पासपोर्ट दिखाकर कहा- मैं भारतीय हूं, था और रहूंगा

वीडियो में ध्रुव राठी ने घटना का विवरण देते हुए दावा किया कि वह सुबह अपने घर में सो रहे थे, तभी सादे कपड़ों में कुछ लोग वहां पहुंचे। उनके मुताबिक, घर का गेट खुलवाने के बाद वे अंदर दाखिल हो गए और उनकी मां को धक्का देते हुए बेडरूम तक पहुंच गए।;

Update: 2026-10-11 08:56 GMT

गुरुग्राम/ नई दिल्‍ली: यूट्यूबर ध्रुव राठी ने हिरासत में लिए जाने के करीब 20 घंटे बाद रिहा होने पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो में राठी ने दावा किया कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया, बल्कि उनके घर से जबरन उठाकर ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में पहुंचे पुलिसकर्मियों ने उनके परिवार के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें वकील से संपर्क करने तक का मौका नहीं दिया। इस वीडियो में राठी ने पहली बार कैमरे के सामने अपना पासपोर्ट दिखाते हुए भारतीय नागरिकता को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी।

पासपोर्ट दिखाकर नागरिकता पर दिया जवाब

ध्रुव राठी ने वीडियो में उन लोगों की आशंकाओं को खारिज किया, जो मान रहे थे कि विदेशी पासपोर्ट धारक होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने अपना पासपोर्ट दिखाते हुए कहा कि वह भारतीय नागरिक हैं और भारतीय नागरिक ही रहेंगे। इस तरह उन्होंने अपनी नागरिकता को लेकर उठ रहे सवालों का सीधे जवाब देने की कोशिश की। राठी ने कहा कि उनकी हिरासत को लेकर जिस तरह की बातें सामने आ रही हैं, वास्तविक स्थिति उससे अलग है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत हिरासत में लेने के बजाय घर से जबरन ले जाया गया। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई और राठी के आरोपों के संबंध में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है।

‘सो रहा था, तभी घर में घुस आए लोग’

वीडियो में ध्रुव राठी ने घटना का विवरण देते हुए दावा किया कि वह सुबह अपने घर में सो रहे थे, तभी सादे कपड़ों में कुछ लोग वहां पहुंचे। उनके मुताबिक, घर का गेट खुलवाने के बाद वे अंदर दाखिल हो गए और उनकी मां को धक्का देते हुए बेडरूम तक पहुंच गए। राठी का आरोप है कि उन लोगों ने उनका मोबाइल फोन छीन लिया और उन्हें परिवार के सामने जबरन अपने साथ ले गए। उन्होंने कहा कि उन्हें चप्पल तक पहनने का मौका नहीं दिया गया। राठी के मुताबिक, वह उस समय अपने माता-पिता के साथ घर पर थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें वहां से ले जाने की कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब उनके माता-पिता ने इसका विरोध किया, तब भी उनकी बात नहीं सुनी गई। राठी ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया और उनके साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि जबरन ले जाए जाने के दौरान उन्हें चोट भी लगी।

वकील से संपर्क और मोबाइल फोन को लेकर आरोप

ध्रुव राठी ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें अपने वकील से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई। उनका मोबाइल फोन भी उनके पास नहीं था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें एक थाने से दूसरे थाने ले जाया गया और करीब 20 घंटे तक अलग-अलग स्थानों पर बैठाकर रखा गया। राठी ने अपनी वीडियो पोस्ट में कहा कि इस पूरी कार्रवाई को सामान्य हिरासत बताना उचित नहीं है। उन्होंने इसे अपहरण करार देते हुए पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

गुरुग्राम की सोसाइटी से लिया गया था हिरासत में

उपलब्ध घटनाक्रम के मुताबिक, ध्रुव राठी को शनिवार सुबह गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित केंद्रीय विहार सोसाइटी से हिरासत में लिया गया था। बताया गया कि कार्रवाई से पहले देर रात से ही सोसाइटी के बाहर करीब 50 पुलिसकर्मी एकत्र थे। शनिवार सुबह लगभग 8:15 बजे पुलिस टीम राठी के फ्लैट पर पहुंची और दरवाजे की घंटी बजाई। उनकी मां ने दरवाजा खोला, जिसके बाद पुलिस टीम घर के भीतर दाखिल हो गई। उस समय राठी अपने पिता के साथ सोफे पर बैठे थे। पुलिस ने उन्हें अपने साथ ले जाने की कार्रवाई की, जिसका उनके माता-पिता ने विरोध किया। बताया गया कि माता-पिता ने पुलिसकर्मियों से कहा कि यदि जरूरी हो तो उनके बेटे को घर पर ही नजरबंद रखा जा सकता है, लेकिन उसे अपने साथ ले जाने की जरूरत क्यों है। विरोध और कहासुनी के बावजूद पुलिस टीम राठी को अपने साथ ले गई।

दिल्ली पुलिस और आईबी ने की पूछताछ

जानकारी के अनुसार, ध्रुव राठी से दिल्ली पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की टीम ने पूछताछ की। इसके बाद उन्हें गुरुग्राम के सेक्टर-39 स्थित अपराध शाखा कार्यालय में रखा गया। करीब 20 घंटे बाद रविवार को उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद जारी वीडियो में लगाए गए आरोपों ने पुलिस की कार्रवाई, हिरासत की प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और कार्रवाई से जुड़े तथ्य महत्वपूर्ण होंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हिरासत किन परिस्थितियों में ली गई और पूरी प्रक्रिया के दौरान किन नियमों का पालन किया गया।

Tags:    

Similar News