दिल्ली पुलिस के ACP मनस्वी वशिष्ठ सस्पेंड: पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन का नेतृत्व किया था

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, सोमवार, 2 नवंबर को करीब 150 पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और थाना प्रभारी अरुण कुमार का तबादला रद्द करना तथा दोनों अधिकारियों को उनकी पुरानी पोस्टिंग पर वापस भेजना था। पुलिसकर्मियों का कहना था कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर उनकी नाराजगी है।;

Update: 2026-11-03 04:05 GMT

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुए विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित किए जाने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब पुलिसकर्मी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले के विरोध में लामबंद हुए थे। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, सोमवार, 2 नवंबर को करीब 150 पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और थाना प्रभारी अरुण कुमार का तबादला रद्द करना तथा दोनों अधिकारियों को उनकी पुरानी पोस्टिंग पर वापस भेजना था। पुलिसकर्मियों का कहना था कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर उनकी नाराजगी है।

प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की मांग भी उठाई। वे चाहते थे कि उनकी शिकायतें और पक्ष वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखने के लिए उचित व्यवस्था की जाए। इसी घटनाक्रम के बीच एसीपी वशिष्ठ के निलंबन की जानकारी सामने आई है।

शाहदरा थाने में वकील से मारपीट के बाद बढ़ा विवाद

पुलिस और वकीलों के बीच विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई घटना से हुई थी। आरोप है कि थाने में वकील ललित बंसल के साथ मारपीट की गई। इस घटना के बाद वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच तनाव बढ़ गया था। वकीलों ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और थाना प्रभारी अरुण कुमार पर धमकी देने तथा दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के विरोध में वकीलों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया था। मामला बढ़ने के बाद पुलिस प्रशासन पर विवाद को सुलझाने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बना। वकीलों की नाराजगी के बीच यह मामला पुलिस विभाग के भीतर भी चर्चा का विषय बन गया। दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए गए।

28 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों का किया गया था तबादला

विवाद के बाद 28 अक्टूबर को एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और थाना प्रभारी अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया था। अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी थी। इससे वकीलों के विरोध का तत्काल प्रभाव कम हुआ, लेकिन पुलिसकर्मियों के बीच इस फैसले को लेकर असंतोष बना रहा। पुलिसकर्मियों का एक वर्ग दोनों अधिकारियों के तबादले को उचित नहीं मान रहा था। उनका विरोध इसी कार्रवाई को लेकर था। सोमवार को पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन में यह नाराजगी खुलकर सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने दोनों अधिकारियों को उनकी पुरानी पोस्टिंग पर वापस भेजने की मांग की।

निलंबन के कारणों पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार

पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने पुलिस कमिश्नर से मिलने और अपनी बात रखने की मांग की थी। वे चाहते थे कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उनकी शिकायतों पर सुनवाई करें और अधिकारियों के तबादले के मामले पर विचार करें। इस पूरे घटनाक्रम में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ की भूमिका भी चर्चा में रही। बताया गया कि उन्होंने प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। अब उनके निलंबन की खबर सामने आने के बाद पुलिस विभाग के भीतर चल रहे विवाद ने एक नया रूप ले लिया है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि निलंबन का निर्णय केवल प्रदर्शन में उनकी भूमिका के कारण लिया गया या इसके पीछे अन्य प्रशासनिक कारण भी हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से निलंबन के विस्तृत कारणों और आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार है। वकील ललित बंसल के साथ कथित मारपीट से शुरू हुआ विवाद अब पुलिस अधिकारियों के तबादले, पुलिसकर्मियों के विरोध और एसीपी के निलंबन तक पहुंच गया है। आने वाले दिनों में पुलिस प्रशासन का आधिकारिक रुख इस मामले की आगे की दिशा तय कर सकता है।

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