NIA केस में 7 विदेशी नागरिकों को विदेश जाने की इजाजत, परिवार से मिलने अमेरिका-यूक्रेन जा सकेंगे

NIA ने मार्च 2026 में सातों विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि ये लोग म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े लोगों को हथियारों और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने में शामिल थे।;

Update: 2026-09-25 10:08 GMT

नई दिल्ली: दिल्ली की एक विशेष NIA अदालत ने सात विदेशी नागरिकों को सीमित अवधि के लिए अपने परिवार से मिलने विदेश जाने की अनुमति दी है। इनमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और यूक्रेन के छह नागरिक शामिल हैं। अदालत ने सभी आरोपियों को अधिकतम एक महीने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दी है। उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर भारत लौटना होगा और वापसी के 72 घंटे के अंदर अदालत को इसकी सूचना देनी होगी। यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की उस जांच से जुड़ा है, जिसमें आरोपियों पर म्यांमार में उग्रवादी समूहों को हथियार और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने का आरोप लगाया गया है।

छह यूक्रेनी नागरिक भी सूची में

विदेश जाने की अनुमति पाने वाले यूक्रेनी नागरिकों में हुर्बा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुखमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम उर्फ मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं। अदालत ने विदेश यात्रा की अनुमति देते समय आरोपियों के लिए वापसी से संबंधित शर्तें भी तय की हैं। उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर भारत वापस आना होगा। इसके बाद 72 घंटे के भीतर कोर्ट को अपनी वापसी की जानकारी देनी होगी। इस आदेश के तहत विदेश जाने की अनुमति स्थायी रूप से मामले से राहत नहीं है। जांच और न्यायिक कार्यवाही अपनी प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।

NIA ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान NIA ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। हालांकि, मौजूदा चरण में जांच के लिए इन सातों आरोपियों की तत्काल भारत में मौजूदगी जरूरी नहीं है। जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि अदालत चाहे तो आरोपियों से आवश्यक अंडरटेकिंग ली जा सकती है। इस तरह विदेश यात्रा की अनुमति के बावजूद आरोपियों को अदालत की तय शर्तों का पालन करना होगा। NIA की ओर से मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

मैथ्यू वैनडाइक को एक और राहत

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को अमेरिका जाने की अनुमति के अलावा एक अन्य कानूनी राहत भी मिली है। अदालत ने इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत लगाए गए अपराधों से उन्हें डिस्चार्ज करने की अर्जी को भी मंजूर कर लिया। यह आवेदन 18 सितंबर को हुई कंपाउंडिंग के आधार पर दाखिल किया गया था। हालांकि, विदेश जाने की अनुमति मिलने का अर्थ यह नहीं है कि मामले की पूरी जांच समाप्त हो गई है। NIA ने अदालत को स्पष्ट किया है कि जांच जारी रहेगी।

मार्च में हुई थी गिरफ्तारी

NIA ने मार्च 2026 में सातों विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि ये लोग म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े लोगों को हथियारों और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने में शामिल थे। एजेंसी के मुताबिक, आरोपी भारत में टूरिस्ट वीजा पर पहुंचे थे और इसके बाद पूर्वोत्तर भारत की यात्रा की थी। जांच में उन पर मिजोरम के रास्ते अवैध तरीके से म्यांमार में प्रवेश करने का भी आरोप लगाया गया।

म्यांमार में ट्रेनिंग देने का आरोप

NIA का दावा है कि म्यांमार पहुंचने के बाद आरोपियों ने वहां उग्रवादी समूहों से जुड़े लोगों को हथियारों के इस्तेमाल और ड्रोन युद्ध से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण दिया। जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि ट्रेनिंग के लिए यूरोप से ड्रोन लाए गए थे। मामले में NIA इन गतिविधियों, आरोपियों की यात्रा और कथित प्रशिक्षण नेटवर्क से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। फिलहाल ये आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं और मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

तय समय में भारत लौटना जरूरी

अदालत के आदेश के मुताबिक, सातों विदेशी नागरिकों को अधिकतम एक महीने की अवधि के भीतर भारत लौटना होगा। वापसी के बाद 72 घंटे के अंदर कोर्ट को इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा। इस आदेश से आरोपियों को पारिवारिक कारणों से अस्थायी विदेश यात्रा की अनुमति मिली है, जबकि NIA की जांच और अदालत में चल रही कार्यवाही अपनी जगह जारी रहेगी।

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