दिल्ली: वकील से बदसलूकी पड़ी भारी… वीडियो वायरल होने के बाद HC का एक्शन, रोहिणी कोर्ट के जज का तबादला

दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को आदेश जारी करते हुए रोहिणी कोर्ट के जिला जज राकेश कुमार-V को दिल्ली ज्यूडिशियल अकादमी से संबद्ध कर दिया। यह फैसला उस वीडियो के सामने आने के दो दिन बाद लिया गया, जिसमें अदालत के अंदर जज और एक वकील के बीच तीखी बहस दिखाई दे रही थी।;

Update: 2026-05-18 06:04 GMT

नई दिल्ली। राजधानी के रोहिणी कोर्ट में जज और वकील के बीच हुई तीखी बहस अब बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। अदालत के भीतर हुई इस कहासुनी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्रवाई करते हुए जिला जज राकेश कुमार का तबादला कर दिया है। यह मामला न्यायपालिका की कार्यप्रणाली, अदालतों की गरिमा और कोर्ट रूम में आचरण को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। घटना के बाद वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के संगठनों ने भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।

हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश 

दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को आदेश जारी करते हुए रोहिणी कोर्ट के जिला जज राकेश कुमार-V को दिल्ली ज्यूडिशियल अकादमी से संबद्ध कर दिया। यह फैसला उस वीडियो के सामने आने के दो दिन बाद लिया गया, जिसमें अदालत के अंदर जज और एक वकील के बीच तीखी बहस दिखाई दे रही थी। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज द्वारा जारी आदेश के अनुसार, न्यायिक अधिकारी धीरज मित्तल को दिल्ली ज्यूडिशियल अकादमी से रोहिणी कोर्ट में जिला जज-4 के पद पर नियुक्त किया गया है।

सुनवाई के दौरान बढ़ा विवाद 

जानकारी के अनुसार, यह घटना 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान हुई थी। सुनवाई के समय बचाव पक्ष के वकील ने मामले में स्थगन यानी तारीख बढ़ाने की मांग की थी। इसी बात को लेकर जज और वकील के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि माहौल बेहद गर्म हो गया और कोर्ट रूम में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में जज अपने मंच से खड़े होकर ऊंची आवाज में वकील से बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। बाद में कोर्ट स्टाफ उन्हें उनके चैंबर तक ले जाता नजर आता है। वकील ने आरोप लगाया कि उनके साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। बताया जा रहा है कि बहस के दौरान वकील ने घटना की रिकॉर्डिंग शुरू कर दी थी। वीडियो सामने आने के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।

लंबित मामलों के निपटारे के निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया है कि संबंधित न्यायिक अधिकारी अपने पास लंबित मामलों और सुरक्षित रखे गए फैसलों का ब्यौरा पोस्टिंग बदलने से पहले उपलब्ध कराएंगे। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि लंबित फैसलों का निपटारा दो से तीन सप्ताह के भीतर किया जाए, ताकि न्यायिक कार्य प्रभावित न हो।

ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन ने जताई नाराजगी 

इस पूरे घटनाक्रम पर दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन ने भी प्रतिक्रिया दी है। एसोसिएशन ने अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और उसे सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को अनुचित और गैरकानूनी बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि इस तरह की रिकॉर्डिंग अदालतों की गरिमा को प्रभावित करती है और न्यायिक अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है। संगठन ने दिल्ली हाईकोर्ट से मांग की है कि वायरल वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्देश दिए जाएं।

वकीलों ने किया हड़ताल का ऐलान

दूसरी ओर, दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने इस घटना को लेकर विरोध जताया है। जिला अदालत बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने सोमवार को न्यायिक कार्य से दूर रहने का फैसला लिया है। वकीलों का कहना है कि अदालतों में सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखना जरूरी है और इस मामले में उचित कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन ने वकीलों की हड़ताल का विरोध किया है। संगठन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार अदालतों में हड़ताल को अवैध माना गया है।

न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस घटना ने अदालतों में अनुशासन, व्यवहार और कार्यवाही की रिकॉर्डिंग जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट रूम में तनावपूर्ण स्थितियों से बचने के लिए सभी पक्षों को संयम बनाए रखना जरूरी है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के दौर में अदालतों से जुड़ी घटनाएं तेजी से सार्वजनिक हो जाती हैं, जिससे न्यायिक संस्थाओं की छवि पर भी असर पड़ सकता है।

Tags:    

Similar News