दिल्ली में रावण के साथ जलेगा 30 फीट का कॉकरोच! CJP प्रमुख अभिजीत दिपके बोले- मुफ्त में प्रचार

कॉकरोच का पुतला जलाने की योजना ऐसे समय सामने आई है, जब सीजेपी राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शनों के कारण चर्चा में है। संगठन ने शुरुआत में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया था। बाद में वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में भी शामिल हुआ।;

Update: 2026-10-20 10:44 GMT

नई दिल्ली: दशहरा और रामलीला के आयोजन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राजधानी के पीतमपुरा में इस बार रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों के साथ 30 फीट ऊंचा कॉकरोच का पुतला भी जलाने की योजना है। इस फैसले ने धार्मिक आयोजन के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा छेड़ दी है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आयोजकों का व्यंग्यात्मक अंदाज में धन्यवाद किया। वहीं, संगठन की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने पूरे विवाद को तमाशा करार दिया है। दूसरी ओर, आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि कॉकरोच का पुतला जलाने के पीछे कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है, बल्कि इसके जरिए स्वच्छता का संदेश देने की योजना है।

अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया

पीतमपुरा में कॉकरोच का विशाल पुतला जलाने की योजना सामने आने के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मंगलवार को कहा, ''मुफ्त में प्रचार करने के लिए धन्यवाद।'' उनके इस बयान को आयोजन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने भी इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए इसे तमाशा बताया। हालांकि, संगठन की ओर से इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है। कॉकरोच का पुतला जलाने की योजना के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

समिति ने बताई पुतला जलाने की वजह

दिल्ली के पीतमपुरा में हर साल रामलीला का आयोजन करने वाली श्री केशव रामलीला समिति ने कॉकरोच का पुतला जलाने के फैसले के पीछे स्वच्छता को मुख्य वजह बताया है। समिति के मुताबिक, कॉकरोच गंदगी और मैल का प्रतीक होगा। इसके जरिए लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने और स्वच्छ भारत तथा स्वच्छ दिल्ली अभियान का संदेश देने की योजना बनाई गई है। समिति का कहना है कि दशहरा केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देने का अवसर भी है। इसी सोच के तहत इस बार पारंपरिक पुतलों के साथ कॉकरोच का पुतला शामिल करने का फैसला लिया गया है।

भाजपा विधायक अशोक गोयल ने क्या कहा?

रामलीला समिति के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अशोक गोयल ने इस फैसले को लेकर राजनीतिक मंशा होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि कॉकरोच का पुतला जलाने का उद्देश्य किसी राजनीतिक संगठन या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने आयोजन के पीछे बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने और स्वच्छता के महत्व को उजागर करने की बात कही। समिति के स्पष्टीकरण के बावजूद इस फैसले को लेकर सार्वजनिक चर्चा जारी है। कुछ लोग इसे स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास मान रहे हैं, जबकि कुछ ने धार्मिक आयोजन में इस तरह के प्रतीक को शामिल करने की उपयुक्तता पर सवाल उठाए हैं।

सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों के बीच चर्चा तेज

कॉकरोच का पुतला जलाने की योजना ऐसे समय सामने आई है, जब सीजेपी राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शनों के कारण चर्चा में है। संगठन ने शुरुआत में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया था। बाद में वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में भी शामिल हुआ। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण कॉकरोच के पुतले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि त्योहार के पारंपरिक महत्व को मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, कई लोगों ने समिति के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि स्वच्छता जैसे सार्वजनिक मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का उपयोग किया जा सकता है।

दशहरे पर क्यों किया जाता है रावण दहन?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने विजयादशमी के दिन रावण का वध किया था। इसी घटना की स्मृति में हर साल दशहरे पर रावण के पुतले जलाए जाते हैं। कई स्थानों पर मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन भी किया जाता है। रावण दहन को बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर देशभर में रामलीलाओं का आयोजन होता है और बड़ी संख्या में लोग पुतला दहन देखने पहुंचते हैं। 

प्रमुख शहरों में रावण दहन का समय

नई दिल्ली: शाम 5:48 बजे के बादलखनऊ: शाम 5:35 बजे के बादनोएडा: शाम 5:47 बजे के बादगाजियाबाद: शाम 5:47 बजे के बादकानपुर: शाम 5:38 बजे के बाद वाराणसी: शाम 5:26 बजे के बाद जयपुर: शाम 5:54 बजे के बादभोपाल: शाम 5:51 बजे के बादमुंबई: शाम 6:12 बजे के बादपटना: शाम 5:18 बजे के बादपुणे: शाम 6:30 बजे के बादकोलकाता: शाम 5:07 बजे के बादहैदराबाद: शाम 5:21 बजे के बादबेंगलुरु: शाम 5:58 बजे के बादचेन्नई: शाम 5:47 बजे के बाद

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