दिल्ली में CJP प्रदर्शन पर सियासी बवाल, ममता बनर्जी और केजरीवाल हिरासत में

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अन्य नेताओं के साथ हिरासत में ले लिया गया। आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी हिरासत में लिए जाने की खबर है।;

Update: 2026-10-10 09:43 GMT

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर शनिवार को दिल्ली समेत कई शहरों में राजनीतिक तनाव बढ़ गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंचने की कोशिश की। इस दौरान पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अन्य नेताओं के साथ हिरासत में ले लिया गया। आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी हिरासत में लिए जाने की खबर है। वहीं, चंडीगढ़ में मनीष सिसोदिया और पंजाब AAP के कई नेताओं के खिलाफ भी पुलिस ने कार्रवाई की। इन घटनाओं के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार और पुलिस पर लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया है।

मुंह पर बैंड-एड लगाकर प्रदर्शन में पहुंचीं ममता बनर्जी

जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश के दौरान ममता बनर्जी मुंह पर बैंड-एड लगाए नजर आईं। वह तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के साथ प्रदर्शन में शामिल होने पहुंची थीं। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने ममता बनर्जी के अलावा डेरेक ओ'ब्रायन, डोला सेन, प्रतिमा मंडल और समीरुल इस्लाम को हिरासत में लिया। जानकारी के मुताबिक, हिरासत में लिए गए नेताओं को प्रिजन वैन में बैठाकर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब CJP के प्रदर्शन के मद्देनजर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।

TMC ने बताया लोकतंत्र के लिए काला दिन

ममता बनर्जी और पार्टी के अन्य नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को गिरफ्तार करना कब से सामान्य प्रक्रिया बन गया है।

TMC ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के बजाय उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए ‘मो-शाह की जोड़ी’ पर भी निशाना साधा और कहा कि कोई भी सरकार जवाबदेही से ऊपर नहीं होती। पार्टी ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई जारी रहेगी।

केजरीवाल ने कहा- इमरजेंसी से भी बुरा दौर

AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मौजूदा स्थिति को इमरजेंसी से भी बदतर बताया। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि विमान से उतरते ही लोगों को हिरासत में लेना सरकार के डर को दर्शाता है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि सरकार चुनाव में कथित गड़बड़ियों से जुड़े सवालों को दबाने की कोशिश कर रही है। केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा।

चंडीगढ़ में मनीष सिसोदिया और AAP कार्यकर्ता हिरासत में

चंडीगढ़ में भी चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन हुआ। मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे मनीष सिसोदिया और पंजाब AAP के कार्यकर्ताओं तथा नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों ने प्रदर्शन के अधिकार और प्रशासन के रवैये को लेकर सवाल उठाए।

अजिंक्य शिंदे संभालेंगे आंदोलन

CJP नेता अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में वह कहते हैं कि यदि लोग यह संदेश देख रहे हैं, तो उन्हें, आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में लिया जा चुका है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि उनके बाद अजिंक्य शिंदे आंदोलन की कमान संभालेंगे और इसे आगे बढ़ाएंगे।

हिरासत के बीच अभिजीत दीपके की दादी का निधन

इस बीच अभिजीत दीपके के परिवार से दुखद खबर सामने आई। उनकी करीब 80 वर्षीय दादी सावित्रीबाई शंकर दीपके का शनिवार को लंबी बीमारी के बाद महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव में निधन हो गया। अभिजीत दीपके मूल रूप से छत्रपति संभाजीनगर के निवासी हैं, जबकि संतुक पिंपरी उनका पैतृक गांव है। उनकी दादी के निधन से परिवार और गांव में शोक का माहौल है। जानकारी के अनुसार, उनके माता-पिता छत्रपति संभाजीनगर स्थित अपने आवास से गांव पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। दीपके की हिरासत के बीच परिवार के लिए यह मुश्किल समय है।

प्रदर्शन से बढ़ा राजनीतिक टकराव

CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने और विभिन्न नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि राजधानी में पुलिस सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में जुटी है।

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