महिला पत्रकार के आरोपों के बीच ACP विवेक भगत को अतिरिक्त DCP का चार्ज नहीं, सरकार ने बदला आदेश

विवाद के बीच दिल्ली सरकार ने पहले जारी आदेश में बदलाव करने का फैसला किया है। सरकार के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेशों के 12 अधिकारियों को एडिशनल DCP का CDC देने की प्रक्रिया 25 अगस्त को शुरू हुई थी। यानी यह प्रक्रिया 3 अक्टूबर को सामने आए आरोपों से पहले शुरू हो चुकी थी।;

Update: 2026-10-06 05:44 GMT

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने ACP विवेक भगत को एडिशनल DCP का करेंट ड्यूटी चार्ज (CDC) देने के फैसले पर रोक लगा दी है। भगत पर 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार के साथ कथित यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है। उनके खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले की जांच की मांग को लेकर पिछले तीन दिनों से पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन हो रहा है। विवाद के बीच दिल्ली सरकार ने पहले जारी आदेश में बदलाव करने का फैसला किया है। सरकार के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेशों के 12 अधिकारियों को एडिशनल DCP का CDC देने की प्रक्रिया 25 अगस्त को शुरू हुई थी। यानी यह प्रक्रिया 3 अक्टूबर को सामने आए आरोपों से पहले शुरू हो चुकी थी। 5 अक्टूबर को सक्षम स्तर से मंजूरी मिलने के बाद आदेश जारी किया गया था। हालांकि, मौजूदा विवाद को देखते हुए अब विवेक भगत के संबंध में आदेश में संशोधन किया गया है।

विवेक भगत ने खुद चार्ज लेने से किया इनकार

दिल्ली सरकार के मुताबिक, ACP विवेक भगत ने खुद कहा कि महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए कथित उत्पीड़न के आरोपों की पूरी जांच होने तक वह अतिरिक्त DCP का चार्ज नहीं लेना चाहते। इसके बाद सरकार ने पहले जारी आदेश में बदलाव कर दिया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अन्य 11 अधिकारियों को CDC देने से संबंधित आदेश अलग से दोबारा जारी किया जाएगा। इस तरह भगत के मामले में फैसला सीधे तौर पर मौजूदा आरोपों और जांच की स्थिति से जुड़ा हुआ है।

CDC को लेकर सरकार ने दी सफाई

दिल्ली सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि करेंट ड्यूटी चार्ज को नियमित पदोन्नति नहीं माना जाता। यह एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसके तहत किसी अधिकारी को कुछ समय के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाती है। सरकार के अनुसार, CDC मिलने से संबंधित अधिकारी को कोई अतिरिक्त आर्थिक लाभ नहीं मिलता। इसके अलावा CDC प्राप्त अधिकारी उस पद पर नियमित रूप से तैनात अधिकारी के सभी वैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल भी नहीं कर सकता। सरकार ने कहा कि इस व्यवस्था का अधिकारी के वेतन, वरिष्ठता या अन्य नियमित सेवा लाभों पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए इसे नियमित प्रमोशन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान लगे आरोप

3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन का आयोजन चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में किया गया था। इसी प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर कथित यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। इनमें से एक पत्रकार ने आरोप लगाया कि ACP विवेक भगत ने उनके सीने पर हाथ मारा। आरोप सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और प्रदर्शनकारियों ने संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग शुरू कर दी।

FIR और CCTV जांच की मांग

5 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। उनकी प्रमुख मांग थी कि ACP विवेक भगत के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और घटना के समय की CCTV फुटेज की जांच कराई जाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्होंने घटना वाले दिन ही पुलिस से CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और उसकी जांच करने की मांग की थी। उनका दावा है कि उन्हें 24 घंटे बाद आने के लिए कहा गया। दोबारा थाने पहुंचने के बाद भी कथित तौर पर उन्हें CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं कराई गई और FIR दर्ज करने या जांच की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया

FIR दर्ज करने और CCTV फुटेज की जांच की मांग को लेकर थाने के बाहर प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराना और आरोपों पर कानूनी कार्रवाई की मांग करना है। फिलहाल ACP विवेक भगत को अतिरिक्त DCP का चार्ज देने के आदेश में बदलाव कर दिया गया है। वहीं, महिला पत्रकारों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच और FIR से जुड़ा विवाद अलग से जारी है। मामले में CCTV फुटेज, शिकायतों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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