नई दिल्ली: राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा के नौ नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनमें पार्टी के महासचिव एमए बेबी, वरिष्ठ नेता वृंदा करात और केरल के कई प्रमुख नेता शामिल बताए गए हैं। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दीपके और सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को भी गुरुग्राम में हिरासत में लिए जाने की खबर है। विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सरकार चुनाव आयोग के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों और प्रक्रियात्मक जरूरतों का हवाला देते हुए प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया है।
माकपा के नौ नेताओं को हिरासत में लिया गया
जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश के दौरान जिन माकपा नेताओं को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है, उनमें एमए बेबी, वृंदा करात, पिनाराई विजयन, ईपी जयराजन, एमवी गोविंदन, केके शैलजा, पीके श्रीमती, केएन बालगोपाल और जॉन ब्रिटास शामिल हैं। माकपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट साझा कर इस कार्रवाई की जानकारी दी। पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के लिए दिल्ली पहुंचने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, हिरासत में लिए गए सभी नेताओं की स्थिति, उन्हें कहां रखा गया है और उनकी रिहाई को लेकर पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूरी है।
अभिजीत दीपके और सौरव दास को एयरपोर्ट पर रोका
माकपा ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि CJP नेता अभिजीत दीपके को दिल्ली एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया गया, ताकि वह प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुंच सकें। पार्टी के अनुसार, CJP से जुड़े सौरव दास को भी दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया। इसके अलावा, CJP नेता आशुतोष रांका और अन्य लोगों के खिलाफ भी पुलिस कार्रवाई किए जाने की खबरें सामने आई हैं। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित केंद्रीय विहार इलाके से हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इन कार्रवाइयों को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। हालांकि, अलग-अलग व्यक्तियों को हिरासत में लेने के कानूनी आधार और पुलिस की कार्रवाई के विस्तृत कारणों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है।
CPI(M) General Secretary M.A Baby and senior leaders were detained by the Delhi police today ahead of the march to Jantar Mantar where India will demand the resignation of Gyanesh Kumar.
Comrades Brinda Karat, M.V Govindan, P.K. Sreemathy, and P. Rajeev were among the leaders detained.
— CPI (M) (@cpimspeak) October 10, 2026
‘ज्ञानेश कुमार से कौन सवाल करेगा?’
माकपा ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आने वालों को हिरासत में लेना किस आधार पर उचित है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार यह तय करने की कोशिश कर रही है कि राजधानी में कौन आ सकता है, कौन विरोध प्रदर्शन कर सकता है और कौन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से सवाल पूछ सकता है। माकपा ने लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग करते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की भी मांग की। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसके कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।
तुषार गांधी को मुंबई में हिरासत में लेने की खबर
दिल्ली के अलावा मुंबई में भी चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर कार्रवाई की खबर सामने आई है। महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी को मुंबई पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। वह मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने वाले थे। इस घटनाक्रम के बाद विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए अलग-अलग शहरों में की जा रही पुलिस कार्रवाई पर बहस और तेज हो गई है।
कई विपक्षी दलों का समर्थन
CJP के आह्वान पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में वामपंथी दलों के साथ आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के शामिल होने की बात कही गई है। वामपंथी दलों में माकपा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), भाकपा-माले, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के नाम शामिल हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। पुलिस कार्रवाई के बीच विपक्षी दलों ने विरोध के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही का मुद्दा उठाया है। अब इस पूरे मामले में हिरासत में लिए गए नेताओं की स्थिति और पुलिस की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण पर नजर रहेगी।