दिपके रिहा होकर घर रवाना: दादी के अंतिम संस्कार में नहीं हो सके शामिल; परिवार ने दिल्ली पुलिस पर लगाए आरोप

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद रिहा हुए अभिजीत दिपके रविवार को अपने परिवार के पास जाने के लिए रवाना हुए। उन्होंने बताया कि उनकी दादी का निधन हो गया है और इस मुश्किल समय में वह अपने परिजनों के साथ रहना चाहते हैं।;

Update: 2026-10-11 09:40 GMT

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। रविवार को वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के आवास से निकलने के बाद दिपके ने कहा कि ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा के नाम पर पूरी दिल्ली को ठप कर दिया गया और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद रिहा हुए दिपके ने बताया कि वह अपनी दादी के निधन के बाद परिवार के साथ रहने के लिए घर जा रहे हैं। इस बीच, उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस की कार्रवाई के कारण वह अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके।

‘ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा के लिए हुई परेशानी’

कपिल सिब्बल के आवास से बाहर निकलने के दौरान अभिजीत दिपके ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सुरक्षा के लिए राजधानी में इतनी सख्ती क्यों की गई कि आम लोगों को असुविधा झेलनी पड़ी। दिपके ने कहा, “पूरी दुनिया ने देखा कि क्या हुआ। ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा के लिए पूरी दिल्ली को ठप कर दिया गया। आखिर ज्ञानेश कुमार में ऐसा क्या है कि उनकी सुरक्षा के लिए कल लाखों लोगों को असुविधा उठानी पड़ी?” उनके इस बयान के बाद दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान लागू किए गए सुरक्षा इंतजामों और आम लोगों की आवाजाही पर उनके प्रभाव को लेकर बहस तेज हो सकती है। CJP मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। पार्टी के नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

हिरासत के बाद रिहा हुए दिपके

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद रिहा हुए अभिजीत दिपके रविवार को अपने परिवार के पास जाने के लिए रवाना हुए। उन्होंने बताया कि उनकी दादी का निधन हो गया है और इस मुश्किल समय में वह अपने परिजनों के साथ रहना चाहते हैं। दिपके की रिहाई और उनके घर जाने का घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब CJP के नेताओं ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि प्रदर्शन से जुड़े नेताओं को हिरासत में लेने के दौरान पुलिस ने सख्ती बरती। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई और हिरासत से संबंधित आरोपों पर आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

दादी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने का आरोप

अभिजीत दिपके के परिवार के मुताबिक, उनकी 85 वर्षीय दादी सावित्रीबाई शंकरराव दिपके का महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में लंबी बीमारी के बाद शनिवार को निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार रविवार सुबह किया गया। परिवार का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने दिपके को समय पर रिहा नहीं किया, जिसके कारण वह अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए समय पर घर नहीं पहुंच सके। परिजनों ने दावा किया कि उन्होंने दिपके से संपर्क करने और उन्हें घर पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन हिरासत के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया। इस घटनाक्रम ने परिवार के बीच दुख और नाराजगी बढ़ा दी है। परिजनों ने सवाल उठाया है कि जब परिवार में किसी बुजुर्ग का निधन हो गया था, तब दिपके को समय पर घर जाने का अवसर क्यों नहीं मिला।

मां अनीता दिपके ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

अभिजीत दिपके की मां अनीता दिपके ने अपने बेटे को दादी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाने देने को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि आखिर उनके बेटे ने ऐसा कौन-सा अपराध किया था, जिसके कारण उसे परिवार के इस दुखद अवसर पर भी घर जाने का मौका नहीं मिला। अनीता दिपके ने कहा, “उन्होंने ऐसा क्या गुनाह किया था कि उन्हें अपनी दादी के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं होने दिया गया? उन्होंने क्या अपराध किया है? क्या वह कोई आतंकवादी या देशद्रोही हैं?” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि उनके बेटे को हवाई जहाज से ले जाया गया, लेकिन इसके बावजूद उसे अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके बेटे के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया।

CJP के आंदोलन के बीच बढ़ा विवाद

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP का विरोध प्रदर्शन दिल्ली में राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है। पार्टी के नेता सुरक्षा व्यवस्था, हिरासत और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अभिजीत दिपके के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों ने इस विवाद में मानवीय पहलू भी जोड़ दिया है। अब पुलिस का पक्ष और हिरासत से जुड़े तथ्यों का सामने आना महत्वपूर्ण होगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दिपके की रिहाई में देरी किन परिस्थितियों में हुई और उनके परिवार के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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