कांग्रेस ने औरंगजेब की कब्र पर जाने वाले भाजपा नेताओं का किया 'पर्दाफाश'

एआईएमआईएम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी जब से औरंगजेब की कब्र पर गए हैं, तब से सियासी संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है

Update: 2022-05-16 22:53 GMT

मुंबई। एआईएमआईएम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी जब से औरंगजेब की कब्र पर गए हैं, तब से सियासी संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और सांसद-विधायक राणा दंपति ने एआईएमआईएम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी के औरंगजेब की कब्र पर फूल चढ़ाने वाले घटनाक्रम की आलोचना की है।

वहीं अब कांग्रेस भी इस विवाद में कूद पड़ी है और उसने भाजपा नेताओं पर अतीत में औरंगजेब की कब्र पर जाने को लेकर निशाना साधा है।

कांग्रेस महासचिव सचिन सावंत ने कई भाजपा नेताओं की पुरानी तस्वीरें और वीडियो खोज निकाले हैं, जिन्होंने कथित तौर पर खुल्दाबाद में दिवंगत मुगल सम्राट औरंगजेब के दफन स्थल का दौरा किया था।

उन्होंने कहा, बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और प्रवक्ता और जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. दर्शन अंद्राबी कोरोना काल में औरंगजेब की कब्र पर गए थे।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इसी तरह, भाजपा के अल्पसंख्यक मामलों के उपाध्यक्ष खालिद कुरैशी भी वहां गए थे और 2019 में, जब वर्तमान विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस भाजपा के सीएम थे, तब 2019 में एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी वहां श्रद्धांजलि देने गए थे।

सावंत ने कहा, मकबरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार क्षेत्र में है। तो फिर केंद्र सरकार औरंगजेब की कब्र पर प्रवेश को नियंत्रित या प्रतिबंधित क्यों नहीं कर सकती?

उन्होंने आश्चर्य जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ओवैसी और यहां तक कि खुल्दाबाद में औरंगजेब के अंतिम विश्राम स्थल पर गए भाजपा नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई क्यों नहीं करती है।

सावंत ने भाजपा, मनसे और निर्दलीय सांसद नवनीत कौर-राणा और उनके विधायक पति रवि राणा पर तेलंगाना के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी द्वारा 12 मई को कब्र का दौरा करने के लिए महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार को दोषी ठहराने की भी आलोचना की।

कुछ भाजपा और मनसे कार्यकर्ताओं ने ओवैसी को औरंगजेब के ठीक बगल में एक कब्र में दफनाने की धमकी दी है और राणा दंपति ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को ओवैसी की यात्रा के लिए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चुनौती दी, जिससे एक प्रमुख राजनीतिक विवाद छिड़ गया है।

शिवसेना नेता किशोर तिवारी और अन्य एमवीए नेताओं ने ऐसी मांगों को खारिज कर दिया है।

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