कांग्रेस के नेतृत्व में बनेगा उप्र में गठबंधन

सपा-बसपा ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन बनाया। लेकिन कांग्रेस को इसमें शामिल नहीं किया। अब अखिलेश और मायावती पर उनका यह दांव भारी पड़ता दिख रहा है

Update: 2019-02-15 06:26 GMT

नई दिल्ली। सपा-बसपा ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन बनाया। लेकिन कांग्रेस को इसमें शामिल नहीं किया। अब अखिलेश और मायावती पर उनका यह दांव भारी पड़ता दिख रहा है। प्रदेश में प्रियंका गांधी की इंट्री के बाद से कांग्रेस में उत्साह का माहौल है। और कई छोटी-छोटी पार्टियां कांग्रेस से गठबंधन की कोशिश में जुट गई हैं। इसे लेकर सपा-बसपा के साथ ही बीजेपी में भी बेचैनी दिख रही है। क्योंकि बीजेपी के भी सहयोगी कांग्रेस से गठजोड़ की कोशिश में जुटे हैं।

राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी को पूर्वी यूपी की कमान सौंपी उसके बाद से कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने लिए मौका देख रही है।  लेकिन इसका असर पूरे प्रदेश पर दिख रहा है। लेकिन कांग्रेस को अपनी कमजोरी का अहसास भी है। और इसलिए उसने छोटे दलों के साथ गठबंधन पर विचार शुरू कर दिया है। और कांग्रेस गठबंधन में महान दल की इंट्री भी हो चुकी है। जल्द ही इस लिस्ट में कई और नाम जुड़ने वाले हैं।

शिवपाल यादव ने संकेत दिए हैं कि वह कांग्रेस से  गठबंधन को तैयार हैं। कांग्रेस ने भी शिवपाल के प्रति नरमी के संकेत दिए हैं। लेकिन मामला सीटों की संख्या पर फंस रहा है। शिवपाल 20 सीटों पर दावा कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस उन्हें आधा दर्जन सीटों से ज्यादा देने का तैयार नहीं है। शिवपाल के साथ राजा भैया का जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक),  पीस पार्टी, जनवादी पार्टी और निषाद पार्टी भी कांग्रेस से गठबंधन करना चाहती है।

राष्ट्रीय लोकदल भी बदली परिस्थितियों में अपनी रणनीति पर फिर से विचार कर रहा है। सपा-बसपा गठबंधन ने उसे सिर्फ 2 सीटें दी हैं। जबकि पार्टी किसी भी सूरत में चार से कम सीटों पर लड़ने तैयार नहीं है। रालोद का कांग्रेस के साथ 2014 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन था। ऐसे में रालोद भी कांग्रेस से हाथ मिला सकता है। कांग्रेस के पाले में सिर्फ सपा-बसपा के करीबी दल ही नहीं जुट रहे हैं।

बल्कि कांग्रेस बीजेपी को भी झटका देने की कोशिश में जुट गई है। बीजेपी से नाराज चल रहे ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और अनुप्रिया पटेल की अपना दल भी कांग्रेस के पाले में आ सकते हैं। उत्तर प्रदेश में गठबंधन की यह पूरी कवायद प्रियंका गांधी की निगरानी में हो रही है।  जिस तरह से कांग्रेस उत्तर प्रदेश में कदम बढ़ा रही है। उससे बीजेपी तो परेशान दिख ही रही है। परेशान सपा-बसपा भी अब कांग्रेस के प्रति नरम पड़ने लगी हैं।

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