छत्तीसगढ़ सरकार ने किया नर्सों की मांगों पर विचार करने के लिए समिति का गठन

छत्तीसगढ सरकार ने शासकीय अस्पतालों की नर्सों की विभिन्न मांगों पर शुरू से ही संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया है

Update: 2018-06-02 15:29 GMT

रायपुर। छत्तीसगढ सरकार ने शासकीय अस्पतालों की नर्सों की विभिन्न मांगों पर शुरू से ही संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया है। 

प्रमुख सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने कहा है कि नर्सो की मांगों पर तत्काल सकारात्मक पहल करते हुए अन्य राज्यों में नर्सों को मिल रहे ग्रेड.वेतन आदि की जानकारी लेने के लिए एक समिति का गठन किया। समिति गठन का आदेश मंत्रालय से जारी हो गया है। समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट दो माह के भीतर प्रस्तुत की जाएगी। शासन द्वारा गठित इस समिति में नर्सों के संघ की दो प्रतिनिधियों में श्रीमती नीलिमा शर्मा अध्यक्ष स्टाफ नर्स एसोसिएशन अम्बेडकर अस्पताल रायपुर और डॉ रीना राजपूत प्रांतीय उप सचिवए स्टाफ नर्स एसोसिएशन को भी शामिल किया गया है।

ज्ञात हो कि नर्सों की हड़ताल 18 मई से चल रही है। विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने बताया कि नर्सों की जायज मांगों पर सरकार पूरी गंभीरता और सहृदयता से विचार कर रही है। इसके बाद भी जब दस दिनों तक हड़ताल समाप्त नहीं हुई तो आम जनता और विशेष रूप से गरीब मरीजों के हितों को ध्यान में रखकर 28 मई को गृह विभाग द्वारा उनकी हड़ताल पर अत्यावश्यक सेवा अधिनियम एस्मा लागू किया गया।

उन्होंने बताया कि एस्मा लागू होने के बाद भी तीन दिन तक सरकार ने उदारता के साथ लचीला रूख अपनाया तथा कई दौर की बातचीत के जरिए नर्सों को समझाने का प्रयास किया और यह उम्मीद रखी कि नर्सें हड़ताल से वापस आ जाएंगी । हडताल से वापस नहीं लौटने पर कल शुक्रवार को पुलिस ने आंदोलनकारी 607 नर्सों को गिरफतार किया गया था। इनमें से 225 नर्सों को केंद्रीय महिला जेल में रखा गया है। शेष गिरफ्तार की गई नर्सों को महिला जेल के बाहर कैंपस में बिठाकर रखा गया है।

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