छत्तीसगढ़ के चार साहसी बच्चों को मिलेगा वीरता पुरस्कार
रायपुर ! राज्य वीरता पुरस्कार 2016-17 के लिए प्रदेश के चार बहादुर बच्चों का चयन किया गया है। कृषि मंत्री तथा राज्य वीरता पुरस्कार निर्णायक समिति के अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल की;
रायपुर ! राज्य वीरता पुरस्कार 2016-17 के लिए प्रदेश के चार बहादुर बच्चों का चयन किया गया है। कृषि मंत्री तथा राज्य वीरता पुरस्कार निर्णायक समिति के अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित समिति की बैठक में इन बच्चों के साहसिक कारनामों पर विचार करने के बाद उनका चयन किया गया। राज्यपाल बलरामजी दास टंडन इन बच्चों को आगामी 26 जनवरी गणतंत्र दिवस को राजधानी रायपुर के पुलिस मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर इन्हें सम्मानित करेंगे। पुरस्कार के लिए चयनित बच्चों में कु. राधिका साहू पिता ईश्वर लाल साहू, ग्राम परसदा पोस्ट सांकरा तहसील व जिला बालोद, चिरंजीव अथर्व श्रीवास्तव पिता मनीष श्रीवास्तव, शिव सदन पुराना सिविल लाईन महासमुंद, कु.लक्ष्मी यादव, पिता द्वारका प्रसाद यादव, गली नं. 4, शक्तिनगर रायपुर तथा चिरंजीव प्रभुराम मझवार पिता स्व. सुख सिंह मझवार, ग्राम गुरमा, पो. चिर्रा, जिला कोरबा शामिल हैं। समिति की बैठक में छत्तीसगढ़ भवन एवं सन्ननिर्माण कर्मकार मंडल के उपाध्यक्ष सुभाष तिवारी, गृह विभाग के सचिव अरूण देव, सचिव महिला एवं बाल विकास डॉ.एम गीता, कलेक्टर रायपुर ओपी चौधरी, एनसीसी स्टेट सेल छत्तीसगढ़ के विकास वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद के महासचिव डॉ. अशोक त्रिपाठी, संयुक्त सचिव श्रीमती इंदिरा जैन, प्रीतेश गांधी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती शीला शर्मा, सहायक प्रभारी अधिकारी बीएस तिवारी, अजय त्रिपाठी उपस्थित थे। राज्य वीरता पुरस्कार 2016-17 के लिए चयनित बच्चों के प्रेरणादायक साहसिक कारनामें इस प्रकार हैं।
कु. राधिका साहू गहरे तालाब में डूबते बच्चे को बचाया ग्राम परसदा जिला बालोद निवासी कु. राधिका साहू, उम्र 17 वर्ष 28 जुलाई 2015 को गांव के तालाब में बर्तन साफ करने गई थी। तालाब की गहराई लगभग 10 फीट है। तालाब के दूसरे किनारे पर कुछ छोटे-छोटे बच्चे खेल रहे थे। एक बच्चा देवकुमार पिता चन्द्रशेखर उम्र 3 वर्ष खेलते-खेलते फिसलकर तालाब में गिर गया और गहरे पानी में डूबने लगा। बच्चे को डूबते देख कु. राधिका साहू ने तत्काल निर्णय लेकर बच्चे को बचाने तालाब के गहरे पानी में कूद गई। तैरते हुए बच्चे के पास पहुंचने पर कु. राधिका को उस बच्चे के पैर दिखाई दिए, जिसे पकडक़र राधिका ने देवकुमार को तालाब से बाहर निकाला। देवकुमार के पेट में पानी भर गया था। देवकुमार कुछ बेहोश हुए जैसे हो गया था। राधिका ने तत्कालिक सूझबूझ परिचय देते हुए बच्चे को उल्टा कर उसके पेट से पानी बाहर निकाला। कुछ देर बाद देवकुमार को होश आ गया। कु. राधिका देवकुमार को लेकर उसके घर गई और पूरे परिवार को घटना की जानकारी दी।
कु. राधिका साहू ने इस घटना के संबंध में पूछने पर बताया कि उसने बर्तन साफ करते समय तालाब के दूसरे छोर पर एक बच्चे को तालाब में डूबते देखा और बच्चे को बचाने के लिए कूद पड़ी। कु. राधिका के त्वरित निर्णय से एक अनहोनी घटना होते-होते बच गई।
अथर्व श्रीवास्तव ने वीरता से अपने छोटे भाई की बचाई जान
घटना 15 अप्रैल 2016 को दोपहर एक बजे शिवसदन पुराना सिविल लाईन महासमुंद निवासी श्री मनीष श्रीवास्तव का छोटा बेटा चिरंजीव वीर श्रीवास्तव, उम्र 2 साल, घर के प्रथम तल के स्टोर रूम में खेल रहा था। खेलते-खेलते बालक वीर ने स्टोर रूम का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। काफी देर होने के बाद वीर स्टोर रूम से निकलने के लिए बंद दरवाजे को खोलने लगातार प्रयास करने लगा। दरवाजा नहीं खुलने पर वह जोर-जोर से रोने लगा। उस समय श्री मनीष श्रीवास्तव के पिता और बड़ा बेटा अथर्व श्रीवास्तव उम्र 7 वर्ष घर में मौजूद थे। चिरंजीव अथर्व ने स्टोर रूम में अपने छोटे भाई के रोने की आवाज सुनकर दौड़ते हुए अपने दादाजी को इसकी जानकारी दी। स्टोर रूम में बंद बालक वीर रोते-रोते कभी दरवाजे के पास आता तो कभी स्टोर रूम में रखी फ्रिज के पास जाता। फ्रिज पुराना होने से उसमें बिजली का करंट लगने की भी संभावना थी। इस स्थिति में अथर्व और उसके दादा ने मिलकर स्टोर रूम का दरवाजा खोलने का प्रयास करने लगे। दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण खुल नहीं रहा था। अथर्व के दादा ने तत्काल इसकी सूचना अपने बेटे मनीष श्रीवास्तव को दी। वे तत्काल घर पहुंचे और खुद भी दरवाजा खोलने का प्रयास करने लगे। स्टोर रूम में अधिक देर तक बंद रहने के कारण वीर श्रीवास्तव रोते-रोते थक गया और बंद दरवाजे के पास ही लेट गया।
इस परिस्थिति में परिवार के सदस्य बंद दरवाजा तोडऩे के लिए बढ़ई बुलाने की बात करने लगे। तभी अथर्व श्रीवास्तव ने अपने परिजनों को सुझाव देते हुए कहा कि अगर उसे किसी प्रकार स्टोर रूम के रोशन दान तक पहुंचा दिया जाए तो वे अंदर कूदकर और दरवाजा खोलकर अपने छोटे भाई को बचा सकता है। उनके परिजनों ने अथर्व को किसी तरह रोशनदान तक पहुंचाया। अथर्व रोशनदान से अंदर घुसकर छज्जे में पहुंचा और वहां से आठ फूट नीचे फर्श पर कूदा, जिससे उसके पैर में चोट भी आई। अथर्व ने तत्काल बंद दरवाजे को खोला और अपने भाई वीर श्रीवास्तव को सकुशल बाहर निकाल लाया। इस तरह अथर्व श्रीवास्तव ने बहादुरी और सूझबूझ से अपने छोटे भाई की जान बचाई।
कु. लक्ष्मी यादव ने अपने आपको अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़ाकर एक अपहरणकर्ताओं को पकड़वाया।
शक्तिनगर रायपुर की कु. लक्ष्मी यादव दो अगस्त 2016 की शाम 8 बजे अपने पड़ोसी मित्र विक्की देवकर के साथ गणेशनगर मार्ग पर मोटरसाइकिल के पास खड़ी होकर बात कर रही थी। उसी समय पार्वतीनगर के एक बदमाश और उसके दो साथी वहां पहुंचकर कु. लक्ष्मी यादव और उसके मित्र के साथ गाली-गलौच करते हुए मारपीट कर मोटरसाइकिल की चाबी जबरदस्ती छीन ली। इसके बाद आरोपी और उसके साथी कु. लक्ष्मी का अपहरण कर उसे मोटरसाइकिल में जबरदस्ती बिठाकर अनजान स्थान की ओर ले जाने लगे। कु. लक्ष्मी के मित्र विक्की देवकर ने अपने अन्य साथियों को इसकी सूचना दी और वे कु. लक्ष्मी की तलाश करने लगे। तीनों आरोपी लक्ष्मी यादव को सुनसान इलाके के एक खाली प्लाट में ले गए। तभी कु. लक्ष्मी ने साहस दिखाते हुए मोटरसाइकिल की चाबी निकाल ली और अपने पास रख ली। आरोपियों द्वारा लक्ष्मी को पकडऩे का प्रयास किया गया तो वे आरोपियों को धक्का देकर घटना स्थल से भागी तथा सीधे थाने पहुंचकर इस घटना की जानकारी दी। पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी कु. लक्ष्मी को साथ लेकर घटना स्थल पर शीघ्र पहुंच गई। कु. लक्ष्मी द्वारा मोटर साइकिल की चाबी निकाल लिए जाने के कारण आरोपी घटना स्थल से भाग नही पाए। पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर पहले एक आरोपी को पकड़ लिया। उसके बाद उसके दोनों साथियों को भी पकडऩे में पुलिस को कामयाबी मिली। इस तरह बहादुर कु. लक्ष्मी यादव अपनी हिम्मत से अपहरणकर्ताओं से छूटकर अपहरणकर्ताओं को पकड़वाने में सफल हुई। असामाजिक तत्वों द्वारा की गई इस घटना से कु. लक्ष्मी के परिजनों में भय व्याप्त हो गया। छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद के आजीवन सदस्य श्री राजेंद्र निगम कुमारी लक्ष्मी के साहस की जानकारी मिलने पर वे लक्ष्मी के परिजनों के साथ थाने में जाकर पुलिस से मिले।
चिरंजीव प्रभुराम मझवार ने भालू से अपने भाई को बचाया।
कोरबा जिले के सघन वन क्षेत्र के ग्राम गुरमा के 16 वर्षीय प्रभुराम मझवार के पराक्रम की कहानी वनवासियों में हौसला जगाती है। हर साल माह फरवरी और मार्च में भालुओं के हमले से वनवासियों के घायल होने की घटनाएं अक्सर होती रहती है। इन दोनों माह में महुआ में फूल आते हैं। वनवासी इन्हीं महुआ फूलों को इक_ा करने जंगल जाते हैं और भालू महुआ खाने जंगलों से निकलते हैं। घटना 29 मार्च 2016 की है। सुबह 7 बजे ग्राम गुरमा निवासी स्व. सुखसिंह मझवार का बेटा प्रभुराम मझवार अपने छोटे भाई सात साल के जोईधा मझवार के साथ महुआ बिनने गए थे। दोनों बच्चे महुआ बिन रहे थे। उसी समय जंगल से एक भालू वहां आ धमका। भालू को देखकर प्रभुराम मझवार महुआ के पेड़ पर ही चढ़ गया। उसे देखकर उसका छोटा भाई भी पेड़ पर चढऩे लगा, लेकिन वह असफल रहा। प्रभुराम मझवार ने अपने छोटे भाई जोईधा को पेड़ पर चढ़ाने के लिए अपना हाथ दिया और उसे ऊपर खींचने लगा। उसी समय भालू जोईधा के दाहिने पैर को पकड़ लिया और नीचे खींचने लगा। यह देखकर प्रभुराम पेड़ से नीचे कूद गया और अपने छोटे भाई की जान बचाने के लिए अपने पास रखी कुल्हाड़ी से लगातार वार करने लगा और तब तक वार करता रहा जब तक भालू ने उसके भाई को छोड़ नही दिया। उसके बाद भालू वहां से भाग गया। भालू ने जोईधा के दाहिने पैर को नोंचकर जख्मी कर डाला, परन्तु उसके बड़े भाई प्रभुराम के पराक्रम से उसकी जान बच गई। भालू के भागने के बाद प्रभुराम अपने छोटे भाई जोईधा को कंधे में उठाकर गांव ले आया और घटना की सूचना गांव वालों और वन विभाग के कर्मचारियों को दी। गांव वालों ने तुंरत 108 संजीवनी एक्सप्रेस को बुलवाकर घायल जोईधा को जिला अस्पताल कोरबा ले जाकर इलाज कराया। घटना के संबंध में चर्चा करने पर प्रभुराम ने बताया कि घटना के समय उसे केवल अपने छोटे भाई की चिंता थी। उसे भालू से बिल्कुल भी डर नहीं लगा। कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने समिति की बैठक में राज्य वीरता पुरस्कार जीतने वाले बच्चों को दिए जाने वाले नगद पुरस्कार की राशि बढ़ाने के लिए अधिकारियों को और अधिक तत्परता से कार्रवाई करने को कहा।