उच्च न्यायाजय की समयसीमा खत्म, फिर भी कर्मचारियों को डीए नहीं मिला: ढिल्लों
पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) का भुगतान नहीं करने तथा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने में देरी करने का आरोप लगाया है;
ढिल्लों का आप सरकार पर हमला - आदेश टालने का लगाया आरोप
- वित्त विभाग का विवादित निर्देश - न्यायिक आदेश पर प्रशासनिक अड़ंगा
चंडीगढ़। पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) का भुगतान नहीं करने तथा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने में देरी करने का आरोप लगाया है।
श्री ढिल्लों ने मंगलवार को कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने तीन अगस्त को लंबित डीए और डीआर के भुगतान के संबंध में सरकार को 15 दिन की समयसीमा दी थी, जो मंगलवार को समाप्त हो गई, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका बकाया नहीं मिला है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वित्त विभाग की ओर से 17 अगस्त को जारी पत्र में सभी प्रशासनिक विभागों को निर्देश दिया गया है कि उच्च न्यायालय के सिविल रिट याचिका संख्या 7291/2026 में दिये गये फैसले से संबंधित आदेशों को वित्त विभाग की पूर्व सहमति के बिना लागू न किया जाये। उन्होंने इसे उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में प्रशासनिक अड़ंगा बताया।
श्री ढिल्लों ने आरोप लगाया कि वित्त विभाग का यह निर्देश अदालत के आदेश में ऐसी शर्त जोड़ने के समान है, जो न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई प्रशासनिक निर्देश संवैधानिक अदालत के आदेश को कमजोर, स्थगित या विलंबित नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि जब उच्च न्यायालय ने आदेश का “कड़ाई से पालन” करने के निर्देश दिये हैं, तो सरकार के पास आंतरिक विभागीय आदेश जारी कर उसके क्रियान्वयन पर पुनर्विचार करने या उसे टालने की कोई गुंजाइश नहीं है।
श्री ढिल्लों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार का रवैया कर्मचारी और पेंशनर विरोधी है तथा उसे उच्च न्यायालय के आदेशों का भी सम्मान नहीं है। उन्होंने कहा, “सरकारी कर्मचारी किसी तरह की खैरात, सब्सिडी या राजनीतिक उपहार नहीं मांग रहे हैं। वे उस राशि की मांग कर रहे हैं जो उन्हें कानूनी और वैध रूप से मिलनी है।”
भाजपा नेता ने सवाल किया कि यदि सरकार प्रचार, विज्ञापन और राजनीतिक ब्रांडिंग पर पैसा खर्च कर सकती है तो कर्मचारियों द्वारा अर्जित डीए और उसके बकाये का भुगतान क्यों नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि आप सरकार चुनाव से पहले वादे करती है और चुनाव के बाद भुगतान के समय वित्तीय संकट का बहाना बनाती है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों के वैध बकाये को वित्तीय कठिनाइयों का हवाला देकर रोका नहीं जाना चाहिए।
श्री ढिल्लों ने पंजाब सरकार से उच्च न्यायालय के आदेश को राजनीतिक सुझाव की तरह नहीं, बल्कि बाध्यकारी न्यायिक निर्देश के रूप में लेते हुए उसका तत्काल, पूर्ण और अक्षरश: पालन करने की मांग की।