पंजाब बजट पर भाजपा का हमला – महिलाओं संग बड़ा धोखा

पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने पंजाब के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट पंजाब की माताओं-बहनों के साथ बड़ा धोखा है

Update: 2026-03-09 05:05 GMT

अश्वनी शर्मा बोले: किसानों और कर्मचारियों की उम्मीदें टूटीं

  • 9300 करोड़ का प्रावधान, 15 हजार करोड़ की जरूरत – योजना पर सवाल
  • एमएसपी वादे अधूरे, स्वास्थ्य सेवाओं की भी अनदेखी
  • केंद्र की योजनाओं को अपना बताकर पेश कर रही सरकार – भाजपा

चंडीगढ़। पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने पंजाब के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट पंजाब की माताओं-बहनों के साथ बड़ा धोखा है और किसानों, कर्मचारियों, आम जनता को निराश करने वाला है।

श्री शर्मा ने रविवार को यहां कहा कि 16 मार्च 2022 को बनी आम आदमी पार्टी की सरकार के चार वर्ष यानी 48 महीने पूरे होने जा रहे हैं। यदि भगवंत मान सरकार वास्तव में महिलाओं के प्रति संवेदनशील होती, तो उन्हें 1000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से पिछले चार वर्षों के 48 हजार रुपये एकमुश्त देने का प्रावधान बजट में करती।

श्री शर्मा ने कहा कि सरकार ने 1000 या 1500 रुपये देने की घोषणा तो की है, लेकिन इसके लिए पूरा बजट भी नहीं रखा गया। इस योजना के लिए लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जबकि बजट में मात्र 9300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सरकार ने योजना के लिए पंजीकरण की शर्त लगा दी है। जिस तरह 10 लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा योजना का पंजीकरण अब तक पूरा नहीं हो पाया, उससे साफ है कि इस योजना का पंजीकरण भी लंबे समय तक लटका रहेगा और महिलाओं को लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ भी धोखा हुआ है क्योंकि चुनावी वादों के बावजूद सभी 24 फसलों पर एमएसपी नहीं दी गई और एमएसपी को कानूनी गारंटी भी नहीं बनाया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत आने वाले फंड को भी अपना बताकर पेश कर रही है। सड़कों के लिए लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं केंद्र सरकार की योजना के तहत हैं, गरीबों के लिए बन रहे मकान, अमरूत 2.0 के तहत 3504 करोड़ रुपये, स्कूलों में बनने वाले कमरे और कंप्यूटर जैसी सुविधाएं भी केंद्र सरकार के फंड से ही उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बजट में स्वास्थ्य सेवाओं और कर्मचारियों के हितों की भी अनदेखी की गई है, जिससे जनता में निराशा है।

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