आपकी कार का इंश्योरेंस रिन्यूअल प्रीमियम अचानक क्यों बढ़ गया? जानें 7 वजहें
Why has your car insurance renewal premium suddenly increased? Find out 7 reasons.;
कार इंश्योरेंस रिन्यू कराते समय अगर आपको पिछले साल के मुकाबले ज्यादा प्रीमियम देना पड़ रहा है, तो इसकी कई वजहें हो सकती हैं। खासकर तब यह बात हैरान कर सकती है, जब आपकी कार में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ हो। हालांकि, हर साल इंश्योरेंस का प्रीमियम एक जैसा रहे, यह जरूरी नहीं है।
प्रीमियम बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें पिछले साल किया गया क्लेम, नो क्लेम बोनस, अतिरिक्त कवरेज और पॉलिसी की शर्तें शामिल हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आपके कार इंश्योरेंस का रिन्यूअल प्रीमियम क्यों बढ़ सकता है।
1. आपने पिछले साल इंश्योरेंस क्लेम किया था
अगर आपने पिछले पॉलिसी पीरियड में अपनी कार के नुकसान के लिए क्लेम किया था, तो रिन्यूअल के समय प्रीमियम बढ़ सकता है।
इसका एक बड़ा कारण आपकी कार इंश्योरेंस पॉलिसी (car insurance policy) पर मिलने वाला नो क्लेम बोनस (NCB) खत्म हो जाना है। आमतौर पर क्लेम करने पर अगले साल मिलने वाला यह डिस्काउंट खत्म हो जाता है। हालांकि, एनसीबी प्रोटेक्शन जैसे ऐड-ऑन होने पर शर्तें अलग हो सकती हैं।
इसलिए प्रीमियम बढ़ने पर पिछले साल की क्लेम हिस्ट्री जरूर चेक करें।
2. आपका नो क्लेम बोनस कम या खत्म हो गया है
नो क्लेम बोनस यानी एनसीबी वह छूट है, जो बिना क्लेम किए पॉलिसी रिन्यू कराने पर मिलती है।
लगातार क्लेम न करने पर यह डिस्काउंट 20% से बढ़कर अधिकतम 50% तक बढ़ सकता है। यह छूट केवल ओन डैमेज प्रीमियम पर मिलती है, थर्ड-पार्टी प्रीमियम पर नहीं।
अगर आपने क्लेम किया है या पॉलिसी खत्म होने के 90 दिनों के भीतर रिन्यू नहीं कराया, तो सामान्य नियमों के अनुसार एनसीबी का फायदा खत्म हो सकता है।
इसलिए पुरानी और नई पॉलिसी में एनसीबी जरूर शामिल करें।
3. आपने पॉलिसी में अतिरिक्त कवरेज जोड़ा है
अगर आपने इस साल अपनी पॉलिसी में नए ऐड-ऑन शामिल किए हैं, तो प्रीमियम बढ़ सकता है।
इनमें कुछ आम ऐड-ऑन शामिल हैं:
● जीरो डेप्रिसिएशन: क्लेम के दौरान कुछ पार्ट्स पर डेप्रिसिएशन की कटौती से राहत देता है।
● रोडसाइड असिस्टेंस: रास्ते में गाड़ी खराब होने पर सहायता देता है।
● इंजन प्रोटेक्शन: पॉलिसी की शर्तों के अनुसार इंजन से जुड़े कुछ नुकसान कवर करता है।
ज्यादा सुविधाओं के लिए अतिरिक्त प्रीमियम देना पड़ सकता है। इसलिए रिन्यूअल से पहले जांचें कि आपको किन ऐड-ऑन की जरूरत है।
4. आपकी कार की इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू बदल गई है
इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (आईडीवी) आपकी कार की तय बीमित कीमत होती है। चोरी या पूरी तरह नुकसान होने की स्थिति में यह क्लेम की अधिकतम सीमा तय करने का आधार बनती है।
कार पुरानी होने पर आमतौर पर उसकी आईडीवी घटती है। लेकिन अगर रिन्यूअल के समय ज्यादा आईडीवी चुनी गई है, तो ओन डैमेज प्रीमियम बढ़ सकता है।
इसलिए पुरानी और नई पॉलिसी की आईडीवी की तुलना करें। केवल प्रीमियम कम करने के लिए बहुत कम आईडीवी चुनने से बचें।
5. आपने वॉलंटरी डिडक्टिबल बदल दिया है
वॉलंटरी डिडक्टिबल वह रकम है, जिसे आप क्लेम के समय कंपल्सरी डिडक्टिबल के अलावा खुद देने के लिए तैयार होते हैं।
अगर पिछले साल आपने ज्यादा वॉलंटरी डिडक्टिबल चुना था, तो ओन डैमेज प्रीमियम पर आपको छूट मिली होगी।
लेकिन इस साल आपने यह रकम कम कर दी है, इसलिए प्रीमियम बढ़ सकता है।
इसलिए दोनों पॉलिसी में डिडक्टिबल की रकम जरूर देखें। कम प्रीमियम के लिए ज्यादा डिडक्टिबल चुनने से क्लेम के समय आपकी जेब से ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं।
6. आपकी कार की जानकारी से प्रीमियम प्रभावित हो सकता है
इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम तय करते समय कार से जुड़ी कई जानकारियां देखती हैं।
इनमें कार का मॉडल, वेरिएंट, उम्र, इंजन कैपेसिटी और रजिस्ट्रेशन लोकेशन शामिल हो सकते हैं।
अगर रिन्यूअल कोटेशन में इनमें से कोई जानकारी गलत दर्ज है, तो प्रीमियम भी प्रभावित हो सकता है।
इसलिए कोटेशन में दी गई जानकारी को कार के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) से मिलाएं। गलती मिलने पर पेमेंट से पहले उसे ठीक कराएं।
7. नई पॉलिसी की शर्तें बदल गई हैं
कभी-कभी प्रीमियम बढ़ने की वजह इंश्योरेंस कंपनी की कीमतों या पॉलिसी कवरेज में बदलाव भी हो सकता है।
नई पॉलिसी में ओन डैमेज प्रीमियम, ऐड-ऑन, आईडीवी या डिडक्टिबल पहले से अलग हो सकते हैं। लागू थर्ड-पार्टी प्रीमियम में बदलाव भी कुल रकम को प्रभावित कर सकता है।
इसलिए सिर्फ कुल प्रीमियम देखकर फैसला न लें। दोनों पॉलिसी की कवरेज, कीमत और शर्तें ध्यान से मिलाएं।
निष्कर्ष
कार इंश्योरेंस का रिन्यूअल प्रीमियम बढ़ने के पीछे एक या कई कारण हो सकते हैं। पिछले साल किया गया क्लेम, एनसीबी खत्म होना, नए ऐड-ऑन, आईडीवी में बदलाव या अलग पॉलिसी शर्तें इसकी वजह बन सकती हैं।
पॉलिसी रिन्यू कराने से पहले पुराने और नए कोटेशन की तुलना जरूर करें। अगर प्रीमियम बढ़ने की वजह समझ नहीं आ रही है, तो इंश्योरेंस कंपनी से उसका पूरा ब्रेकडाउन मांगें। इससे आप अपनी ज़रूरत और बजट के अनुसार सही फ़ैसला ले पाएंगे।
स्पष्ट करें कि प्रीमियम कैसे जाँचें क्लेम और एनसीबी को एक साथ समझाएँ रिन्यूअल से पहले चेकलिस्ट जोड़ें
(नोट- यह एक सामान्य जानकारी है, किसी भी हाल में किसी प्रकार की सलाह नहीं है, अपने विवेक का प्रयोग करें)