मुंबई: देश के प्रमुख कारोबारी समूह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को जल्द नया चेयरमैन मिल सकता है। मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी में समाप्त होने वाला है। इसके मद्देनजर नए अध्यक्ष की तलाश शुरू हो गई है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने चेयरमैन के चयन के लिए चयन समिति गठित करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला किया है। चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी का चयन टाटा समूह के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टाटा संस समूह की प्रमुख कंपनियों और रणनीतिक फैसलों में केंद्रीय भूमिका निभाती है। ऐसे में नए चेयरमैन के लिए ऐसे व्यक्ति की तलाश होगी, जिसे समूह के कारोबार, वैश्विक विस्तार और आंतरिक कामकाज की गहरी समझ हो।
TV नरेंद्रन का नाम सबसे आगे
नए चेयरमैन पद के संभावित दावेदारों में टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन का नाम सबसे प्रमुखता से सामने आ रहा है। करीब 61 वर्षीय नरेंद्रन का लगभग पूरा पेशेवर करियर टाटा स्टील में ही बीता है। वह वर्ष 1988 में टाटा स्टील से जुड़े थे और 2013 से कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। नरेंद्रन के पक्ष में सबसे बड़ा आधार उनका लंबा अनुभव माना जा रहा है। करीब 38 वर्षों से टाटा समूह से जुड़े होने के कारण उन्हें समूह की कार्यप्रणाली, कारोबार और वैश्विक बाजार की अच्छी समझ है। उन्होंने टाटा स्टील के कई महत्वपूर्ण विस्तार और बदलाव के दौर में नेतृत्व किया है।
चार नामों पर चर्चा
हालांकि चेयरमैन पद की दौड़ केवल नरेंद्रन तक सीमित नहीं है। संभावित उम्मीदवारों में टाटा संस के सीएफओ सौरभ अग्रवाल, टाटा मोटर्स के एमडी शैलेश चंद्रा और जगुआर लैंड रोवर (JLR) के सीएफओ पीबी बालाजी के नाम भी चर्चा में हैं। इन सभी अधिकारियों के पास टाटा समूह की अलग-अलग महत्वपूर्ण कंपनियों को संभालने का अनुभव है। अंतिम फैसला चयन समिति की प्रक्रिया और ट्रस्टों के बीच सहमति के आधार पर होने की संभावना है।
नोएल टाटा क्यों नहीं बन सकते स्थायी चेयरमैन?
टाटा संस के चेयरमैन पद को लेकर एक महत्वपूर्ण नियम भी इस बार चर्चा में है। टाटा संस के नियमों में 2022 में किए गए संशोधन के मुताबिक टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन और टाटा संस के चेयरमैन का पद एक ही व्यक्ति के पास नहीं हो सकता। टाटा ट्रस्ट के मौजूदा चेयरमैन नोएल टाटा होने के कारण वह नियमित रूप से टाटा संस के चेयरमैन बनने की दौड़ में शामिल नहीं हो सकते। हालांकि असाधारण परिस्थितियों में उन्हें अंतरिम चेयरमैन की जिम्मेदारी दिए जाने का विकल्प खुला रह सकता है।
चयन समिति के गठन में कानूनी अड़चन
नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती चयन समिति के गठन को लेकर बताई जा रही है। टाटा संस के नियमों के अनुसार चेयरमैन का चुनाव पांच सदस्यीय समिति करती है। इसमें तीन सदस्यों को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट संयुक्त रूप से नामित करते हैं। एक सदस्य टाटा संस बोर्ड से होता है, जबकि पांचवां सदस्य बोर्ड की ओर से चुना गया स्वतंत्र सदस्य होता है। यहीं पर मौजूदा विवाद प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले दोनों प्रमुख टाटा ट्रस्टों में से सर रतन टाटा ट्रस्ट फिलहाल महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के निर्देशों से जुड़ी स्थिति के कारण ट्रस्टी बैठकें आयोजित नहीं कर पा रहा है। इससे उत्तराधिकारी चुनने वाली समिति के गठन में अड़चन पैदा हो सकती है।
जरूरत पड़ी तो अंतरिम व्यवस्था संभव
अगर यह कानूनी स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है और फरवरी तक स्थायी चेयरमैन चुनने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती, तो अंतरिम व्यवस्था का विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में नोएल टाटा नए चेयरमैन की नियुक्ति होने तक अंतरिम जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। फिलहाल टाटा समूह के भीतर सबसे बड़ा सवाल यही है कि चंद्रशेखरन के बाद कमान किसे सौंपी जाएगी। टीवी नरेंद्रन का लंबा टाटा अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है, लेकिन चयन समिति के गठन और ट्रस्टों से जुड़े कानूनी मुद्दों के कारण अंतिम फैसला कई स्तरों की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।