नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC बैंक ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को अपना नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया है। बैंक के निदेशक मंडल (Board of Directors) ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। राजीव कुमार इस पद पर पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती का स्थान लेंगे, जिन्होंने मार्च 2026 में नैतिक कारणों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा दे दिया था। बैंक को उम्मीद है कि राजीव कुमार के अनुभव से नेतृत्व और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को नई मजबूती मिलेगी।
नियुक्ति शेयरधारकों और RBI की मंजूरी के अधीन
बैंक की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, राजीव कुमार को 30 जून 2026 से प्रभावी चार वर्षों के लिए अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशक (Additional Independent Director) नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें अगले तीन वर्षों के लिए पार्ट-टाइम चेयरमैन चुना गया है। हालांकि, उनकी नियुक्ति शेयरधारकों की स्वीकृति और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही पूरी तरह प्रभावी होगी।
प्रशासन और वित्तीय क्षेत्र का लंबा अनुभव
1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी रहे राजीव कुमार का सरकारी प्रशासन और वित्तीय क्षेत्र में चार दशक से अधिक का अनुभव रहा है। उन्होंने वर्ष 2017 से 2020 तक भारत सरकार में वित्त सचिव (Finance Secretary) के रूप में कार्य किया। इस दौरान वह भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल (Central Board) और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बोर्ड के सदस्य भी रहे। सरकारी वित्तीय संस्थानों के संचालन और बैंकिंग सुधारों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में भी निभाई बड़ी जिम्मेदारी
राजीव कुमार देश के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त रहे हैं। उनके नेतृत्व में वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव माना जाता है। करोड़ों मतदाताओं वाले इस चुनाव के संचालन को लेकर उन्हें प्रशासनिक दक्षता और निष्पक्षता के लिए सराहा गया था। यही अनुभव अब निजी बैंकिंग क्षेत्र में उनकी नई जिम्मेदारी में भी उपयोगी माना जा रहा है।
बैंकिंग सुधारों में निभाई अहम भूमिका
वित्त सचिव रहते हुए राजीव कुमार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में व्यापक सुधारों का नेतृत्व किया। उस समय बैंक बढ़ते गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA), पूंजी की कमी और वित्तीय दबाव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे थे। उनके नेतृत्व में सरकार ने एनपीए की पारदर्शी पहचान, पर्याप्त प्रोविजनिंग और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। इसके अलावा सरकारी बैंकों के विलय और तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक के पुनर्पूंजीकरण (Recapitalisation) की प्रक्रिया को भी सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया गया।
अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बनी थी अनिश्चितता
HDFC बैंक के पूर्व पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने 18 मार्च 2026 को अपने पद से अचानक इस्तीफा देकर बैंकिंग जगत को चौंका दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा था कि बैंक में कुछ ऐसी घटनाएं और कार्यशैली सामने आईं, जो उनके नैतिक मूल्यों और पेशेवर सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थीं। उनके इस फैसले के बाद बैंक के नेतृत्व और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
बैंक को नई दिशा मिलने की उम्मीद
राजीव कुमार की नियुक्ति को बैंक के लिए स्थिर नेतृत्व की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। बैंक प्रबंधन का मानना है कि सार्वजनिक नीति, वित्तीय प्रशासन और नियामकीय मामलों में उनका व्यापक अनुभव HDFC बैंक की दीर्घकालिक रणनीति और सुशासन को मजबूत करेगा। साथ ही, उनकी नियुक्ति से निवेशकों का भरोसा बढ़ने और बैंक के कॉर्पोरेट गवर्नेंस ढांचे को और मजबूत करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। फिलहाल उनकी नियुक्ति पर अंतिम मुहर शेयरधारकों और भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी के बाद लगेगी।