Budget 2026: बजट बाजार को नहीं आया रास; शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 2300 गिरा निफ्टी 624 अंक से अधिक टूटा

Update: 2026-02-01 08:00 GMT
मुंबई। वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश होने से पहले ही शेयर बाजार में हलचल शुरू हो गई थी। रविवार को विशेष ट्रेडिंग सत्र के तहत खुले घरेलू बाजारों ने शुरुआत लाल निशान पर की। बजट भाषण के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहा, लेकिन जैसे ही सरकार ने सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी की घोषणा की, बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। दोपहर 12:15 बजे तक सेंसेक्स 265 अंक गिरकर 82,004.56 अंक पर आ गया, जबकि निफ्टी 131.35 अंक टूटकर 25,189.30 अंक पर पहुंच गया। निवेशकों ने टैक्स बढ़ोतरी को नकारात्मक संकेत के रूप में लिया, जिसका असर तुरंत सूचकांकों पर दिखाई दिया।

STT बढ़ोतरी बनी गिरावट की वजह

बजट में सरकार ने सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया। यह कदम बाजार सहभागियों के लिए लागत बढ़ाने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, STT में वृद्धि से खासकर डेरिवेटिव और अल्पकालिक ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इससे ट्रेडिंग वॉल्यूम और निवेश धारणा पर असर पड़ सकता है। यही कारण रहा कि बजट घोषणाओं के तुरंत बाद बाजार में बिकवाली तेज हो गई।

शुरुआती कारोबार: हल्की गिरावट से तेजी तक

रविवार सुबह बाजार की शुरुआत मामूली गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 15.04 अंक या 0.02 प्रतिशत गिरकर 82,254.74 अंक पर था। वहीं निफ्टी 31.75 अंक या 0.13 प्रतिशत गिरकर 25,288.90 अंक पर पहुंच गया। हालांकि, कुछ ही देर में बाजार में खरीदारी लौटी और सूचकांक हरे निशान में आ गए। सुबह 10:39 बजे तक सेंसेक्स 255.96 अंक चढ़कर 82,525.74 अंक पर पहुंच गया। निफ्टी 56.60 अंक बढ़कर 25,377.25 अंक पर पहुंच गया। यह तेजी दर्शाती है कि निवेशक बजट के सकारात्मक संकेतों की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन STT बढ़ोतरी के एलान के बाद बाजार की दिशा बदल गई।

सेक्टोरल इंडेक्स में व्यापक गिरावट

बजट के बाद लगभग सभी सेक्टर दबाव में आ गए। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि केवल 2 शेयरों में तेजी रही। BEL, SBI और NTPC के शेयरों में 4 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। निफ्टी के सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे। सबसे ज्यादा दबाव सरकारी बैंकिंग सेक्टर में रहा, जहां करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इसके अलावा मेटल, मीडिया, FMCG
आईटी, फार्मा, फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल्टी सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। विश्लेषकों का मानना है कि टैक्स बढ़ोतरी की खबर ने बाजार की धारणा को नकारात्मक कर दिया, जिससे व्यापक स्तर पर मुनाफावसूली शुरू हो गई।

क्यों खुला बाजार रविवार को?

आमतौर पर शेयर बाजार शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। लेकिन इस बार रविवार को विशेष रूप से कारोबार हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने बजट की अहमियत को देखते हुए ‘विशेष लाइव ट्रेडिंग सत्र’ आयोजित करने का फैसला किया था। एक्सचेंजों की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया कि बजट में होने वाली महत्वपूर्ण नीतिगत घोषणाओं पर बाजार को तुरंत प्रतिक्रिया देने का अवसर मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से रविवार होने के बावजूद बाजार सामान्य दिनों की तरह खुला रखा गया।

पहले भी एक बार खुला था बाजार

आजाद भारत के इतिहास में यह दूसरा अवसर है जब रविवार को शेयर बाजार खुला। इससे पहले 28 फरवरी 1999 को भी रविवार के दिन बाजार में कारोबार हुआ था। उस समय देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे और बजट प्रस्तुति के चलते बाजार को विशेष रूप से खोला गया था। करीब 27 साल बाद फिर से बजट के दिन रविवार को ट्रेडिंग का आयोजन किया गया, जिसने इसे ऐतिहासिक बना दिया।

निवेशकों की प्रतिक्रिया और आगे की दिशा

बाजार में दिनभर दिखी अस्थिरता यह संकेत देती है कि निवेशक बजट की घोषणाओं को सावधानी से परख रहे हैं। एक ओर सरकार ने कई क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने की घोषणा की है, वहीं दूसरी ओर STT बढ़ोतरी जैसे कदमों ने ट्रेडिंग लागत बढ़ा दी है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकाल में अस्थिरता बनी रह सकती है। संस्थागत निवेशकों की रणनीति महत्वपूर्ण होगी। दीर्घकालिक निवेशकों को बजट के व्यापक आर्थिक संकेतों पर ध्यान देना चाहिए।

बाजार की कड़ी परीक्षा

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट दिवस पर बाजार ने उम्मीद, आशंका और प्रतिक्रिया तीनों चरणों को एक ही दिन में देखा। शुरुआती मामूली गिरावट, फिर तेजी और उसके बाद STT बढ़ोतरी के एलान के साथ तेज गिरावट ने यह स्पष्ट कर दिया कि निवेशक कर संबंधी घोषणाओं के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। रविवार को आयोजित विशेष ट्रेडिंग सत्र ने बाजार को तुरंत प्रतिक्रिया देने का मंच तो दिया, लेकिन इससे यह भी साफ हुआ कि बजट की हर घोषणा का सीधा असर निवेश धारणा पर पड़ता है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बाजार इस झटके से उबरकर स्थिरता की ओर बढ़ता है या अस्थिरता का दौर कुछ समय तक जारी रहता है। फिलहाल बजट दिवस पर बाजार की चाल ने निवेशकों को सतर्क रहने का संकेत जरूर दे दिया है।
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