बीएसपी के एजीएम की बर्खास्तगी निरस्त

बिलासपुर ! जाति के मामले को लेकर भिलाई स्टील प्लांट के असिस्टेंट जनरल मैनेजर की सेवा से बर्खास्तगी निरस्त करते हुए हाईकोर्ट ने प्रार्थी को बर्खास्तगी;

Update: 2017-01-13 22:09 GMT

 हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी तिथि से सेवा को निरंतर माना
बिलासपुर   !   जाति के मामले को लेकर भिलाई स्टील प्लांट के असिस्टेंट जनरल मैनेजर की सेवा से बर्खास्तगी निरस्त करते हुए हाईकोर्ट ने प्रार्थी को बर्खास्तगी तिथि से समुचित लाभ देने का आदेश दिया है।
महेश कुमार गोनाडे नियुक्ति सितम्बर1995 को मैनेजमेंट ट्रेनी के रुप में हुई थी और यह नियुक्ति  अनुसूचित जाति के हल्बा के अन्तर्गत हुई थी। इनका जाति प्रमाण पत्र 11/09/1987 उप जिलाधीश, दुर्ग द्वारा जारी किया गया था। इनकी जाति की शिकायत उच्चस्तरीय छानबीन समिति रायपुर में की गई थी। जांचोपरांत उच्चस्तरीय छानबीन समिति द्वारा अपने 15/07/2015 के आदेश में यह कहा कि इनकी जाति हल्बा नहीं कोष्टी है, इसलिए इनको अनुसूचित जनजाति का लाभ प्रदान नहीं किया जाएगा। परंतु उच्चस्तरीय छानबीन समिति ने यह उल्लेख किया कि महाराष्ट्र शासन बनाम मिलिन्द में उच्चतम न्यायालय के न्यायिक दृष्टांत एवं भारत सरकार कार्मिक प्रशिक्षण एवं पेंशन मंत्रालय के ऑफिस मेमोरेण्डम 10/08/2010 के तारतम्य में महेश कुमार गोनाडे की आगे की सेवाएं यथावत् रहेंगी। उच्चस्तरीय छानबीन समिति के उक्त आदेश के उनरांत भिलाई स्टील प्लांट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने आदेश 24/10/2015 के माध्यम से महेश कुमार गोनाडे को सेवा से बर्खास्त कर दिया और यह भी आदेश दे दिया कि उन्हें सीपीएफ, ग्रेच्युटी, पेंशन एवं सेवा संबंधी अन्य लाभ भी नहीं दिए जाएंगे।
इससे क्षुब्ध होकर इन्होंने सेन्ट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल सर्किट बेंच बिलासपुर के समक्ष याचिका दायर की थी। कैट ने अपने आदेश दिनांक 15/12/2015 यह आदेश दिया कि इन्होंने छानबीन समिति के आदेश को चुनौती नहीं दी है एवं छानबीन समिति द्वारा इन्हें हल्बा जाति का नहीं पाया गया,उ इसलिए याचिका को खारिज कर दिया गया।
उक्त आदेश से क्षुब्ध होकर महेश कुमार गोनाडे ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी, रुचि नागर, संदीप सिंह के माध्यम से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की युगलपीठ के समक्ष याचिका प्रस्तुत कर दी, जिसमें कहा गया कि चूंकि उच्चस्तरीय छानबीन समिति रायपुर ने यह पाया है कि वह हल्बा जाति के नहीं है, परंतु कोष्टी जाति के हैं, इसलिए उनको अनुसूचित जाति का लाभ नहीं दिया जाएगा। परंतु छानबीन समिति ने स्वयमेव याचिकाकर्ता को महाराष्ट्र सरकार बनाम मिलिंद के मामले में एवं ऑफिस मेमोरेण्डम 10/08/2010 जिनमें यह उल्लेख किया गया है कि यदि हल्बा जाति/ कोष्टी की नियुक्ति 28/11/2000 के पूर्व हुई है, तो वह सेवा में निरंतर बने रहेंगे। परंतु उनको आगे आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। इन बातों का प्राधिकरण ने एवं इनके नियोक्ता भिलाई स्टील प्लाण्ट ने ध्यान न देते हुए आदेश पारित किया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा एवं न्यायमूर्ति अनिल शुक्ल की युगलपीठ में हुई। उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रतिवादी भिलाई स्टील प्लांट का यह कहना कि याचिकाकर्ता ने उच्चस्तरीय छानबीन समिति रायपुर के समक्ष अपनी जाति से संंबंधित कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं की थी, बल्कि मिलिंद एवं भारत सरकार के आफिस ज्ञापन के अंतर्गत लाभ प्रदान करने का निवेदन किया था। इसलिए याचिकाकर्ता को कोई लाभ नहीं दिया जा सकता, सर्वथा विधिसम्मत व सही नहीं है। जब एक बार उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार बनाम मिलिन्द के मामले में किसी भी हल्बा कोष्टी/ कोष्टी को जिसकी नियुक्ति 18/11/2000 के पूर्व हुई है, को छानबीन समिति के आदेश के बावजूद सेवा में बने रहने का लाभ प्रदान किया है।
इसलिए यह आदेश सभी नियोक्ताओं पर बंधनकारी है। सुनवाई के बाद उच्चन्यायालय ने अपने आदेश में केन्द्रीय प्रशासनिक अभिकरण का आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता की बर्खास्तगी आदेश को भी निरस्त किया साथ ही याचिकाकर्ता को बर्खास्तगी दिनांक से फुल बैक वेजेस का लाभ देते हुए उल्लेख किया कि इनकी सेवाएं निरंतर मानी जाएंगी।
स्वास्थ्य केन्द्र में सुविधाएं नहीं शासन से जवाब तलब
गौरेला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में बुनियादी सुविधाएं नहीं होने के खिलाफ प्रस्तुत की गई याचिका पर आज हाईकोर्ट ने राज्य शासन सहित मुख्य व स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
जानकारी के अनुसार कलीबाई की गर्भवती पुत्री का इलाज के दौरान गौरेला सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र में मृत्यु हो गई थी। स्वास्थ्य केन्द्र में बुनियादी सुविधाओं को लेकर पीडि़त ने हाईकोर्ट में अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका लगाई।  हाईकोर्ट ने शासन से जवाब तलब किया था। आज हाईकोर्ट ने चीफ जस्टिस दीपक गुप्ता व संजय श्याम अग्रवाल की डीबी में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्य शासन सहित मुख्य व स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई मार्च में नियत की गई है।

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