शिक्षक योग्य फिर शिक्षा में गुणवत्ता क्यों नहीं?
बिलासपुर ! शासन के तमाम प्रयासों के बाद भी जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर ऊपर उठाने में सफलता नहीं मिल रही है।;
जिल में 2439 सरकारी स्कूल
753 स्कूलों को मिला सी व डी ग्रेड
बिलासपुर ! शासन के तमाम प्रयासों के बाद भी जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर ऊपर उठाने में सफलता नहीं मिल रही है। जबकि निजी स्कूलों से ज्यादा प्रशिक्षित शिक्षक सरकारी स्कूलों में है। शिक्षा गुणवत्ता अभियान की समीक्षा में यह बात सामने आई है। 2439 प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूलों में 757 स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहद खराब पाया है। शाला विकास व प्रबंधन समिति की निष्क्रियता से भी शिक्षा की स्तर में गिरावट आई है। इस समिति का बैठकें तक नहीं होती।
वर्ष 2015-16 से शिक्षा गुणवत्ता अभियान पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम से शुरू किया गया था। चार चरणों में चलाए जा रहे इस अभियान के पहले चरण की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिले के कई स्कूलों के बच्चों का स्तर काफी खराब है। सरकारी स्कूलों में पदस्थ सभी शिक्षक डीएड, बीएड व एमएड डिग्रीधारी हैं फिर भी ये हाल है जबकि निजी स्कूलों के शिक्षक प्रशिक्षित भी नहीं है फिर भी सरकारी स्कूलों से उनका स्तर अच्छा है। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, उसके बाद भी संतोषजनक परिणाम सामने नहीं आए हैं। शहरी क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति ज्यादा खराब है। यह भी पाया गया है कि अभिभावक भी अपने बच्चों की गतिविधियों में ध्यान नहीं देते। ग्राम पंचायत स्तर में शाला विकास व प्रबंधन समितियां भी है जिनका सतत निगरानी रखना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो पाता।
शाला विकास समितियों को सक्रिय करने की जरुरत
शाला विकास समितियों को सक्रिय करने पर शिक्षा गुणवत्ता अभियान में जोर दिया गया है। ग्राम सभा में शाला विकास व प्रबंध समिति के पास शिक्षा गुणवत्ता संबंधी कोई विशेष कार्ययोजना नहीं है। स्कूलों का सतत् मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है। सभी शालाओं में अध्ययन कर रहे बच्चों की माताओं का उन्मुखीकरण कार्यक्रम शुरू करने की भी आवश्यकता है। शाला प्रबंध समिति की बैठक शिक्षकों के साथ प्रतिमाह आवश्यक है परंतु यहा नियमित नहीं होती।
मध्यान्ह भोजन में समय प्रबंधन जरुरी
सभी प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक शालाओं में मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके लिए समय के प्रबंधन की आवश्यकता बताई गई है। समय नष्ट हो रहा है जिससे पढ़ाई काफी प्रभावित होती है। हालंकि मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है। समय के प्रबंधन से पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय बचाया जा सकता है।
स्कूलों में शिक्षा का स्तर
विकासखण्ड स्कूलों की सी डी ग्रेड
संख्या स्कूल
बिल्हा 477 165
गौरेला 255 132
कोटा 453 172
मरवाही 342 100
पेण्ड्रा 186 35
तखतपुर 368 47
योग 2439 757