बिहार कृषि विश्वविद्यालय में मंत्री ने कई परियोजनाओं का किया उद्घाटन, किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने का दिया संदेश

बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर, भागलपुर में विभिन्न परियोजनाओं एवं अनुसंधान सुविधाओं का उद्घाटन किया तथा विश्वविद्यालय की 31वीं शोध परिषद् बैठक में भाग लेकर वैज्ञानिकों और किसानों को संबोधित किया।;

Update: 2026-06-20 20:41 GMT

भागलपुर। बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर, भागलपुर में विभिन्न परियोजनाओं एवं अनुसंधान सुविधाओं का उद्घाटन किया तथा विश्वविद्यालय की 31वीं शोध परिषद् बैठक में भाग लेकर वैज्ञानिकों और किसानों को संबोधित किया।

अपने दौरे की शुरुआत उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर चल रहे अभियान 'एक पेड़ मां के नाम' के तहत पौधरोपण कर की। इस अवसर पर उन्होंने सिंदूर के पौधे लगाए। मंत्री ने विश्वविद्यालय की विस्तारित एवं संवर्धित मधु प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन किया। इसके विस्तार से शहद प्रसंस्करण क्षमता 2 क्विंटल प्रति छह घंटे से बढ़कर 6 क्विंटल प्रति छह घंटे हो गई है।

उन्होंने स्वचालित शहद फिलिंग प्रणाली का भी शुभारंभ किया, जिसके तहत बॉटलिंग, कैपिंग, सीलिंग और लेबलिंग की पूरी प्रक्रिया बिना मानवीय हस्तक्षेप के संपन्न होगी, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों में सुधार होगा।

इस दौरान मंत्री ने विश्वविद्यालय में स्थापित अत्याधुनिक आणविक पादप रोग प्रयोगशाला का उद्घाटन किया, जो पादप रोगों की वैज्ञानिक जांच एवं अनुसंधान को नई दिशा देगा। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, कटिहार स्थित सामुदायिक रेडियो स्टेशन का भी वर्चुअल उद्घाटन किया। यह रेडियो स्टेशन 20 किलोमीटर के दायरे में लगभग आठ लाख लोगों तक कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और जन-जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों का प्रसारण करेगा।

इसके साथ ही बीएयू के अंतर्गत संचालित सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। 31वीं शोध परिषद बैठक को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि स्थापना के मात्र 15 वर्षों में बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने राज्य की कृषि प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। किसान सबसे बड़ा वैज्ञानिक होता है और अनुसंधान पूरी तरह किसानोपयोगी होना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि शोध और नवाचार किसानों तक पहुंचें तथा उनकी खेती की लागत और मेहनत को कम करें।

कृषि मंत्री ने अलनीनो जैसी जलवायु चुनौतियों से निपटने वाली किस्मों और तकनीकों के विकास पर जोर दिया तथा छोटे और सीमांत किसानों की जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने रसायनों के संतुलित उपयोग और जहर मुक्त खेती को समय की मांग बताते हुए किसानों से अपनी कम से कम 25 प्रतिशत भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कुलपति डॉ. डीआर. सिंह ने कृषि मंत्री के समक्ष जलवायु परिवर्तन एवं सिंदूर फसल पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, कृषि आधारित एआई लैब, राज्य स्तरीय समन्वय समिति तथा पटना जिले में अतिरिक्त कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित पीएम किसान सम्मान निधि उत्सव में 700 से अधिक किसानों ने भाग लिया और किसान सम्मान निधि वितरण कार्यक्रम से वर्चुअल रूप से जुड़े।

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