ईवीएम हटाओ, बैलेट पेपर से चुनाव कराओ: तेजस्वी यादव
विपक्षी दलों की ओर से एसआईआर, ईवीएम और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। इसी बीच ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। बिहार विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने भी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग का समर्थन किया है।;
पटना। विपक्षी दलों की ओर से एसआईआर, ईवीएम और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। इसी बीच ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। बिहार विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने भी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग का समर्थन किया है।
तेजस्वी यादव का यह बयान उस वक्त आया है, जब यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने भी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की।
पटना में तेजस्वी यादव ने कहा कि बैलेट की मांग तो हमलोग शुरू से कर रहे हैं। मशीन को हटाओ, बैलेट को लाओ।
उन्होंने 30 सितंबर को होने वाली इंडिया ब्लॉक की बैठक और सीईसी ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका सबके सामने आ गई है, खासकर यह कि कैसे कथित तौर पर वोटों की चोरी की जा रही है और कैसे भाजपा को एक के बाद एक चुनाव जिताया जा रहा है। उन्होंने बिहार में यह तरीका शुरू किया और बाद में इसे पूरे देश में लागू किया। वोटों की चोरी का तरीका खुद दो चुनाव आयुक्तों ने उजागर किया है। बुधवार को सुबह 11:00 बजे कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में इंडिया गठबंधन की बैठक बुलाई गई है। हम इस बैठक में शामिल होने और अपनी बात रखने के लिए वहां जा रहे हैं। अगर कोई भी आकर वोटों की चोरी कर सकता है, लोकतंत्र को बर्बाद और खत्म कर सकता है और संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट कर सकता है, तो देश कैसे चलेगा।
तेजस्वी यादव ने कहा कि शुरू से ही हमारी यह मांग रही है, और कई अन्य नेताओं ने भी यही मांग की है कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। भाजपा संस्थाओं को नष्ट और उनका गलत इस्तेमाल कर रही है, इसलिए देश की जनता के लिए भाजपा को सत्ता से हटाना बहुत जरूरी है।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग यूपी की पूर्व सीएम और बसपा प्रमुख मायावती ने भी की।
उन्होंने कहा कि चुनाव में मतदाता को इस बात का पूरा भरोसा होना चाहिए कि उसने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, उसका मत उसी के खाते में गया और गिनती में शामिल हुआ। वोट को लेकर संदेह की स्थिति लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।