राहुल गांधी को किसी भी विषय पर टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार नहीं, कांग्रेस में लोकतंत्र नहीं: गुरु प्रकाश पासवान
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने लोकसभा में विपक्ष के नेता की आलोचना करते हुए कहा कि राहुल गांधी को किसी भी तरह की टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है;
पटना। भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने लोकसभा में विपक्ष के नेता की आलोचना करते हुए कहा कि राहुल गांधी को किसी भी तरह की टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई पार्टी मजबूत संगठन के साथ अपनी क्षमता और प्रयासों के दम पर चुनाव लड़ना चाहती है, तो चुनाव के ठीक पहले नेतृत्व में बदलाव जैसी स्थिति पैदा नहीं होती।
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि हाल ही में पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा हुई है और चुनाव से ठीक पहले नेतृत्व में बदलाव किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में अजय राय को हटाकर एक नए चेहरे को जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह अन्य राज्यों में भी चुनाव से पहले नेतृत्व में बदलाव किया गया है। उन्होंने गोवा का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले अपनी आंतरिक तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पर आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि जो पार्टी अपने संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं कर पा रही है, उसे देश के लोकतंत्र पर टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार नहीं है।
वहीं, एनएसयूआई और आईवाईसी के नेताओं की हिरासत और कुछ अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में नहीं लिए जाने के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पासवान ने इंडी गठबंधन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुई इंडी गठबंधन की बैठक के एजेंडे में यह भी तय होना चाहिए था कि किसे भाजपा की 'बी-टीम' कहा जाए।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय पर मायावती, असदुद्दीन ओवैसी और अब सीजेपी को भाजपा की 'बी-टीम' बताया जा रहा है। इन आरोपों का कोई आधार नहीं है और न ही इनका कोई अर्थ है।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठाए जा रहे सवालों पर भी गुरु प्रकाश पासवान ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर संकट पैदा करने का प्रयास उचित नहीं है। यदि किसी को कोई शिकायत है तो वह न्यायिक प्रक्रिया का सहारा ले सकता है।
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि चुनाव हारने पर संस्थाओं की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना और चुनाव जीतने पर सब कुछ ठीक मान लेना सही रवैया नहीं है। उन्होंने इसे 'ग्रामर ऑफ अनार्की' बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।