बिहार में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की होगी न्यायिक जांच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया ऐलान

17 जून की सुबह भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच हुई कथित मुठभेड़ के दौरान गोलीबारी हुई थी। इस घटना में भरत गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।;

Update: 2026-06-21 03:48 GMT
पटना : Bharat Bhushan Tiwari encounter case: बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा पैदा कर दी है। लगातार उठ रहे सवालों और निष्पक्ष जांच की मांग के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस प्रकरण की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है। उन्होंने शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि 17 जून को भोजपुर में हुई घटना के सभी पहलुओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के कानून और न्याय व्यवस्था पर विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार चाहती है कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आए और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो।

17 जून को पुलिस कार्रवाई में घायल हुए थे भरत भूषण तिवारी

जानकारी के अनुसार, 17 जून की सुबह भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच हुई कथित मुठभेड़ के दौरान गोलीबारी हुई थी। इस घटना में भरत गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस का दावा था कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर गोली चलाई थी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उन्हें गोली लगी। वहीं, ग्रामीणों और परिवार के लोगों ने पुलिस के दावों पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी मुठभेड़ बताया। कुछ लोगों ने भरत को मानसिक रूप से अस्वस्थ भी बताया था और कहा था कि परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस को अलग तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए थी।

सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने उठाए सवाल 

भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन के कई नेताओं ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता जताई। जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने घटना पर चिंता व्यक्त की थी। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने भी कहा था कि पूरे मामले की समयबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि यह कोई वास्तविक पुलिस मुठभेड़ नहीं थी, बल्कि सुनियोजित हत्या का मामला है। विपक्ष ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।

चार पुलिसकर्मी पहले ही किए जा चुके हैं निलंबित

घटना के बाद बढ़ते विवाद और जनाक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रारंभिक कार्रवाई के तहत मुठभेड़ में शामिल चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विरोध में हुआ था सड़क जाम और प्रदर्शन

भरत तिवारी की मौत के बाद उनके परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने न्यायिक जांच की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने करीब पांच किलोमीटर लंबे क्षेत्र में सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई थी। इस दौरान कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा और पुलिस-प्रशासन को स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान सरकारी कामकाज और यातायात व्यवस्था बाधित होने का आरोप लगाया।

दर्ज हुआ मामला, कई लोग गांव छोड़कर गए

सड़क जाम और प्रदर्शन की घटना के बाद पुलिस ने 14 नामजद और 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सरकारी कार्य में बाधा डाली गई और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई। इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले भरत तिवारी के पिता और भाई के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई की आशंका के कारण कई नामजद लोग गांव छोड़कर अन्य स्थानों पर चले गए हैं।

अब न्यायिक जांच पर टिकी हैं सबकी निगाहें

भोजपुर एनकाउंटर मामले को लेकर उठे विवाद और राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब सभी की निगाहें न्यायिक जांच पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अगुवाई में होने वाली जांच से घटना के वास्तविक तथ्यों का पता चल सकेगा और यह स्पष्ट होगा कि पुलिस की कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप थी या फिर उसमें किसी प्रकार की चूक हुई। साथ ही, जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई भी तय होगी।
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