बाबू लाल गौर ने कुपोषण के सवाल पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया

मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल गौर ने राज्य में कुपोषित बच्चों की स्थिति पर सवाल पूछकर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। 

Update: 2017-11-28 16:11 GMT

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल गौर ने राज्य में कुपोषित बच्चों की स्थिति पर सवाल पूछकर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने ग्वालियर और ग्वालियर संभाग के जिलों में कुपोषित बच्चों की स्थिति को लेकर सवाल उठाया।  महिला बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने गौर के सवाल का जवाब देते हुए कहा, "कुपोषण की स्थिति में सुधार आया है। इस पर गौर व चिटनीस के बीच नोक-झोक की स्थिति भी बनी।" 

गौर ने सदन के बाहर संवाददाताओं से चर्चा करते हुए बताया कि सरकार की ओर से उन्हें जो जवाब दिया गया है, उसके मुताबिक, ग्वालियर में वर्ष 2014 में 27375, वर्ष 2015 में 30930, वर्ष 2016 में 28530 और वर्ष 2017 के शुरुआती छह माह में 27866 बच्चे कुपोषित हैं।

गौर का कहना है कि गरीबी इस हद तक पहुंच गई है कि कुपोषित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसकी मूल वजह यह है कि माताओं को पोषित आहार नहीं मिल रहा है, वे कमजोर हैं और बच्चे भी कुपोषित हैं।

सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। इस वर्ष मात्र छह माह में कुपोषित बच्चों की संख्या 27866 हो गई है। यह स्थिति चिंताजनक है।  सदन के बाहर नगरीय विकास मंत्री और ग्वालियर से विधायक माया सिंह ने कहा कि कुपोषण को कम करने के प्रयास जारी हैं। 

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