दिल्ली-एनसीआर में ऑटो-टैक्सी चालकों ने किया चक्का जाम, बढ़ेगी लोगों की मुश्किल
ऑटो-टैक्सी चालकों ने दो दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। ऑटो-टैक्सी चालकों की दो दिवसीय हड़ताल के बीच लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है
नई दिल्ली। ऑटो-टैक्सी चालकों ने दो दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। ऑटो-टैक्सी चालकों की दो दिवसीय हड़ताल के बीच लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर में ऑटो और टैक्सी चालक यूनियनों ने ऐप-आधारित कैब सेवाओं की वजह उनकी आजीविका पर पड़ने वाले बढ़ते प्रभाव के विरोध में गुरुवार से हड़ताल की घोषणा की है।
दिल्ली में गुरुवार और शुक्रवार को ऑटो टैक्सी ड्राइवरों ने हड़ताल का ऐलान किया है। बता दें कि ऑटो टैक्सी ड्राइवरों की एक यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली-एनसीआर में चक्का जाम और हड़ताल करने का आह्वान किया।
इस दौरान दो दिनों तक तकरीबन चार लाख यात्री वाहनों के सड़कों पर न उतरने की आशंका रहेगी। हड़ताल के साथ ही जंतर-मंतर पर 22 अगस्त को टैक्सी, ऑटो चालकों का धरना प्रदर्शन भी है।
दिल्ली पुलिस से इस धरने प्रदर्शन को लेकर इजाजत मिल गई। इस विरोध प्रदर्शन के कारण ऑटो और टैक्सियों सहित लगभग चार लाख वाहन सड़कों पर नहीं चलेंगे, जिसकी वजह से 22 और 23 अगस्त को दिल्ली के लोगों को परेशानियों का समाना करना पड़ेगा।
हालांकि, परिवहन विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि हड़ताल का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और लोगों को कोई खास दिक्कत नहीं होगी। ये हड़ताल ओला और उबर सहित ऐप-आधारित कैब सेवाओं के विरोध के रूप की जा रही है, जिसमें दिल्ली-एनसीआर की 15 से ज़्यादा यूनियनें शामिल हैं।
कई मौकों पर अपर्याप्त मुआवजे पर चिंता ज़ाहिर किए जाने के बावजूद, यूनियनों ने केंद्र और राज्य सरकारों पर उनके मुद्दे का समाधान करने में विफल रहने का आरोप लगाया है, वो कहते हैं, “हम कई सालों से ओला और उबर जैसी कंपनियों के बारे में सरकारों और विभागों को लिख रहे हैं, लेकिन कोई नहीं सुनता। ये कंपनियां अपना पक्ष रखती हैं और सरकार अपना पक्ष रखती है, लेकिन ये कारोबार चंदे के खेल के तौर पर चलता है, जिसमें सरकार भी शामिल होती है।