एआईपीईएफ ने पीएम मोदी से किया बिजली कर्मचारियों को फ्रंट लाइन वर्कर्स का दर्जा देने का आग्रह

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया है कि वह बिजली क्षेत्र के उन कर्मचारियों को फ्रंट लाइन वर्कर्स का दर्जा दें

Update: 2021-04-23 18:21 GMT

जालंधर। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया है कि वह बिजली क्षेत्र के उन कर्मचारियों को फ्रंट लाइन वर्कर्स का दर्जा दें जो महामारी की स्थिति में चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति बनाए रख रहे हैं।

एआईपीईएफ के प्रवक्ता वी के गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि अस्पतालों और परीक्षण प्रयोगशालाओं का कामकाज काफी हद तक चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति पर निर्भर करता है और डिस्कॉम के बिजली इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी कोविड-19 से लड़ने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। बिजली आपूर्ति को बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है और इसे आवश्यक सेवा का दर्जा दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारी और इंजीनियर सभी उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं और आम जनता से संपर्क कर रहे हैं और इस प्रकार कोविड-19 के संपर्क में हैं।

गुप्ता ने कहा कि अकेले महाराष्ट्र में बिजली क्षेत्र के कुल 5890 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव संक्रमित हैं और 186 की मौत हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी ऐसे ही हालात मौजूद हैं। उ प्र में चार अधीक्षण अभियंताओं, सहित 15 इंजीनियरों, 24 से अधिक कनिष्ठ अभियंताओं और 50 तकनीशियनों की मौत हो गई है। दूसरे राज्यों के इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों को भी इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। देश भर के सभी बिजली कंपनियों को उत्पादन, पारेषण और वितरण की आकस्मिकताओं के मामले में आपदा प्रबंधन योजना तैयार करनी चाहिए।

पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने पीएसपीसीएल/पीएसटीसीएल प्रबंधन को पत्र लिखकर निगमों के हितों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए विभिन्न उपायों का सुझाव दिया है।

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