आंध्र प्रदेश में विपक्ष का वार दावोस खर्चों पर श्वेत पत्र की मांग
आंध्र प्रदेश में विपक्षी युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे की दावोस यात्रा के दौरान हुए खर्चों और इससे हुए फायदों हुए पर एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है
चंद्रबाबू नायडू की दावोस यात्राओं पर उठे सवाल विपक्ष ने मांगा हिसाब
- निवेश और नौकरियों के दावों पर अविश्वास वाईएसआरसीपी ने दावोस खर्चों का श्वेत पत्र मांगा
अनंतपुर। आंध्र प्रदेश में विपक्षी युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे की दावोस यात्रा के दौरान हुए खर्चों और इससे हुए फायदों हुए पर एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।
पूर्व मंत्री साके शैलजानाथ ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि चंद्रबाबू 15 बार दावोस जा चुके हैं और वे बिना पलक झपकाए निवेश और नौकरियों के बारे में वही बयान देते हैं।
वाईएसआरसीपी नेता ने कहा, "हम मांग करते हैं कि गठबंधन सरकार चंद्रबाबू नायडू और उनके दल की दावोस यात्रा पर खर्च की गई राशि पर एक 'श्वेत पत्र' जारी करे क्योंकि यह जनता का पैसा है जिसे फिजूलखर्ची से खर्च किया जा रहा है। चंद्रबाबू नायडू और उनका मीडिया निवेश और सृजित नौकरियों के बारे में जो डेटा जारी कर रहा है, वह एक मृगतृष्णा है क्योंकि यह आंकड़ा पिछले कई सालों से दिया जा रहा है।"
उन्होंने कहा कि दावोस जाकर मुख्यमंत्री सिर्फ एक परियोजना ग्रीनको का ही काम पूरा कर पाए जो राज्य के पास ही है। उन्होंने पूछा, "इस समझौते के लिए दावोस जाने और जनता का इतना सारा पैसा बरबार करने की क्या जरूरत थी।"
उन्होेंने कहा कि निवेश और लाखों नौकरियां सृजित करने के बड़े-बड़े दावों पर कोई विश्वास नहीं करता, क्योंकि कहानी पुरानी है और लोग इस झूठ से परिचित हो चुके हैं। पूर्व मंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी में विश्वसनीयता थी और वे निवेश ला सकते थे, जबकि चंद्रबाबू नायडू की छवि खराब है और अब कोई उन पर विश्वास करने की स्थिति में नहीं है।
श्री शैलजानाथ ने आलोचना करते हुए कहा, "विशाखापत्तनम में जमीनें रियल एस्टेट कंपनियों को किकबैक के लिए थाली में परोसकर दी जा रही हैं और कोई कैसे एक रियल एस्टेट कंपनी द्वारा नौकरियां पैदा करने की बात पर विश्वास कर सकता है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ रही है और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें मुकदमों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खराब शासन पर तीखे सवाल पूछने वाले सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं को भी परेशान किया जा रहा है।