नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 10 साल कैद
कोरबा ! शादी का झांसा देकर नाबालिग से संबंध बनाने और उसके गर्भवती होने पर इसके लिए खुद को जिम्मेदार मानने से इनकार कर गर्भवती नाबालिक और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को ठुकराने;
कोरबा ! शादी का झांसा देकर नाबालिग से संबंध बनाने और उसके गर्भवती होने पर इसके लिए खुद को जिम्मेदार मानने से इनकार कर गर्भवती नाबालिक और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को ठुकराने वाले युवक को 10 साल के सश्रम करावास की सजा सुनाई गई है। इस प्रकरण में आरोपी युवक के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने और गर्भस्थ शिशु का पिता वह युवक है, इसकी पहचान के लिए पुलिस ने डीएनए टेस्ट का सहारा लिया। आरोपी की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लेने का यह जिले का पहला मामला है।
न्यायालयीन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करतला थाना अंतर्गत ग्राम कटबितला निवासी भरत चौहान 22 वर्ष ने उरगा थाना क्षेत्र की रहने वाली एक नाबालिक को प्रेमजाल में फंसाया और उससे शादी करने का झांसा देकर संबंध बनाये। शारीरिक संबंध के कारण नाबालिक गर्भवती हो गई। इसका पता नाबालिक के परिजनों को चलने के बाद और
दबाव में आकर भरत के परिजनों ने नाबालिक को घर में पनाह दी लेकिन बाद में भरत ने यह कहकर गर्भवती को रखने से इनकार कर दिया कि उसकी गर्भ में पल रहा बच्चा उसका नहीं है। भरत ने नाबालिक को घर से बाहर निकाल दिया। अंतत: पीडि़ता ने 24 अक्टूबर 2015 को भरत चौहान के खिलाफ उरगा थाने में रिपोर्ट लिखाई जिस पर धारा 376 (2)(1) 506 बी और लैंगिक अपराध से बालकों का संरक्षण अधिनियम पाक्सो की धारा 6 के तहत भरत चौहान के विरूद्ध जुर्म दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया। उस वक्त पूछताछ में भरत ने नाबालिग के गर्भ में पल रहे बच्चे को अपनी संतान होने से इनकार किया था। पुलिस ने मामला विचारण हेतु न्यायालय में प्रस्तुत किया। इस बीच नाबालिक ने अस्पताल में पुत्र को जन्म दिया। इस प्रकरण में बच्चे का पिता भरत है या नहीं, इसकी गंभीरता से जांच के लिए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अमरेश मिश्रा ने भरत का डीएनए टेस्ट कराया। 21 नवंबर 2015 को शिशु, उसकी मां और आरोपी भरत के खून का नमूना लेकर पुलिस ने हैदराबाद स्थित सीडीएफडी प्रयोगशाला भेजा। डीएनए टेस्ट में नवजात शिशु का बायोलॉजिकल पिता भरत चौहान को होना बताया गया। रिपोर्ट का उपयोग पुलिस ने भरत के खिलाफ सबूत के तौर पर किया और सजा दिलाने में रिपोर्ट काफी महत्पवूर्ण साबित हुआ। विचाराधीन प्रकरण में फास्ट ट्रैक न्यायाधीश उषा गेंदले ने भरत को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी मानते हुए धारा 376 (2)(1) और लैंगिक अपराध से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 6 के तहत 10-10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई साथ ही दो हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर दोषी को एक-एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।