सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री मान के ओएसडी से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच पर रोक लगाने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी (विशेष ड्यूटी पर तैनात अधिकारी) राजवीर घुमन और अन्य लोगों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में सीबीआई की एफआईआर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन साथ ही यह निर्देश दिया कि इस मामले में कोई कठोर कार्रवाई न की जाए।;
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी (विशेष ड्यूटी पर तैनात अधिकारी) राजवीर घुमन और अन्य लोगों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में सीबीआई की एफआईआर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन साथ ही यह निर्देश दिया कि इस मामले में कोई कठोर कार्रवाई न की जाए।
जस्टिस एम.एम. सुंदेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने पंजाब सरकार की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें सीबीआई को मामला दर्ज करने और आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि राज्य सरकार को जांच में सहयोग करना चाहिए।
पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के 5 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सीबीआई को भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया गया था। ये आरोप एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) द्वारा पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव को लिखे गए तीन पत्रों से जुड़े थे।
हाई कोर्ट ने सीबीआई को मामला दर्ज करने और दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था, साथ ही पंजाब सरकार और पुलिस से केंद्रीय जांच एजेंसी को पूरा सहयोग देने को भी कहा था।
ईडी ने दावा किया था कि घुमन और उनके सहयोगी नितिन गोहल और बीर देविंदर प्रशासनिक ट्रांसफर और पोस्टिंग के साथ-साथ सरकारी टेंडर में भी दखल दे रहे थे और ईडी ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।
जब पंजाब पुलिस ने ईडी के पत्रों के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं की, तो वकील निखिल सराफ ने जनहित याचिका के जरिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया और सीबीआई से स्वतंत्र जांच की मांग की।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि बातचीत में पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों के खिलाफ गंभीर आरोप थे और इसमें पंजाब पुलिस और पंजाब विजिलेंस के प्रभाव से मुक्त निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
सीबीआई ने इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज कर ली है और हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार जांच शुरू कर दी है। केंद्रीय एजेंसी ने चंडीगढ़ और पंजाब में आठ जगहों पर तलाशी भी ली, जिनमें चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री का कैंप ऑफिस और संगरूर व मोहाली में घुमन से जुड़ी जगहें शामिल थीं।
इसके बाद जांच के सिलसिले में घुमन और अन्य सहयोगियों को सीबीआई के चंडीगढ़ ऑफिस में पेश होने के लिए बुलाया गया।
यह मामला पहले जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच के सामने लिस्ट किया गया था। 9 अक्टूबर को जस्टिस नागू ने पंजाब सरकार की याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसके बाद नई बेंच के गठन के लिए मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के सामने रखा गया।