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अमित शाह बनकर राज्यपाल को फोन लगाने वाले दोनों आरोपियों से पूछताछ

अमित शाह के नाम पर फर्जी तरीके से मध्यप्रदेश के राज्यपाल को फोन लगाकर नियुक्ति की सिफारिश करने के मामले में गिरफ्तार किए गए दोनों हाईप्रोफाइल आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।

अमित शाह बनकर राज्यपाल को फोन लगाने वाले दोनों आरोपियों से पूछताछ
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भोपाल। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नाम पर फर्जी तरीके से मध्यप्रदेश के राज्यपाल को फोन लगाकर नियुक्ति की सिफारिश करने के मामले में गिरफ्तार किए गए दोनों हाईप्रोफाइल आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।

राज्य पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने इस मामले में एयरफोर्स में पदस्थ विंग कमांडर कुलदीप बाघेला और पेशे से दंत चिकित्सक डॉ चंद्रेश को गिरफ्तार करने के बाद कल रिमांड पर लिया है।

आरोप है कि मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में डॉ चंद्रेश कुलपति बनना चाहते थे और उन्होंने अपने दिल्ली में पदस्थ मित्र विंग कमांडर कुलदीप बाघेला की मदद से राज्यपाल को इसी सप्ताह केंद्रीय गृह मंत्री बनकर फाेन किया और डॉ चंद्रेश की मदद की बात कही। राज्यपाल ने शक होने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय बात की और धोखाधड़ी का पता चला। इसके बाद राज्यपाल के परिसहाय की शिकायत पर एसटीएफ ने जांच शुरू कर आरोपियों को दबोच लिया।

एसटीएफ के पुलिस अधीक्षक राजेश भदौरिया ने आज यूनीवार्ता को बताया कि दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और इस बिंदू पर भी पूछताछ की जा रही है कि क्या इन्होंने इस तरह से और जगह भी गड़बड़ियां की हैं। दोनों आरोपी तीन दिन तक एसटीएफ की रिमांड पर हैं।

एसटीएफ सूत्रों के अनुसार कुलपति पद के लिए हाल ही में साक्षात्कार हुए थे। स्थानीय निवासी डॉ चंद्रेश ने भी इसके लिए साक्षात्कार दिया था। उसने राज्यपाल से सिफारिश के लिए अपने दोस्त बाघेला से संपर्क साधा, जो पहले राज्यपाल का परिसहाय रह चुका है। डॉ चंद्रेश ने तीन जनवरी को अपने दोस्त बाघेला का मोबाइल फोन कांफ्रेंस पर लिया और फिर दिन में राज्यपाल के निज सहायक को लैंड लाइन फोन पर कॉल किया। इस दौरान डॉ चंद्रेश ने कहा कि वो केंद्रीय गृह मंत्री का निज सचिव बोल रहा है और राज्यपाल से बात कराइए।

सूत्रों के अनुसार राज्यपाल के लाइन पर आते ही सामने वाले व्यक्ति (बाघेला) ने केंद्रीय गृह मंत्री बनकर बात की और कुलपति नियुक्ति मामले में डॉ चंद्रेश की मदद करने की बात कही। राज्यपाल को इस पर शक हुआ और मामले की पड़ताल में पता चला कि फोन केंद्रीय गृह मंत्रालय से नहीं आया था। इसके बाद राजभवन की आेर से पुलिस में शिकायत की गयी।

मामले की जांच के बाद एसटीएफ ने दो दिन पहले दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया और प्रारंभिक पड़ताल के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब दोनों एसटीएफ की रिमांड पर हैं।


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