सभी उम्मीदवारों को भितरघात का भय
ग्रेटर नोएडा ! उत्तर प्रदेश में पहले चरण के प्रथम चुनाव को लेकर प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो चुकी है। शुक्रवार को नामांकन पत्र वापस लेने के बाद किस विधानसभा कितने प्रत्याशी चुनाव मैदान में

भाजपा, सपा, कांग्रेस, बसपा हर पार्टी में उठे अंदरूनी रूप से विरेोध के सुर
ग्रेटर नोएडा ! उत्तर प्रदेश में पहले चरण के प्रथम चुनाव को लेकर प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो चुकी है। शुक्रवार को नामांकन पत्र वापस लेने के बाद किस विधानसभा कितने प्रत्याशी चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे निर्वाचन ने फाइलन प्रत्याशियों की सूची तैयार कर दी है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को अपनी पार्टी के भीतरा घात की दंश सता रही है। ऐसा भी नहीं है कि नाराज पार्टी के नेताओं को मनाने की कोशिश में जुट गए है, कुछ पार्टी के प्रत्याशियों ने नाराज नेताओं को मनाने का प्रयास किया। प्रत्याशी के पहले नाराज नेता गैर मन से प्रचार की हामी भर दी है, इसके बावजूद वे अंदरूनी रूप से विरोध कर रहे हैं।
दादरी विधानसभा को लिया जाए। भाजपा से तेजपाल नागर को टिकट मिला हुआ है। वहां से पूर्व मंत्री नवाब सिंह नागर को टिकट कटने के बाद उनके समर्थक तेजपाल नागर के खिलाफ बागवत की आवाज बुलंद किए है। दादरी विधानसभा से नवाब सिंह नागर की अच्छी खासी पकड़ है जमीन से जुड़े कार्यकर्ता उन्हें नवाब सिंह नागर की अनदेखी को भूल नहीं पा रहे है। तेजपाल नागर ने नाराज पार्टी नेताओं कार्यकर्ता को मनाने के लिए बूथ स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजन किया। सम्मेलन में ज्यादातर संगठन से जुड़े कार्यकर्ता नहीं पहुंचे। प्रत्याशी तेजपाल सिंह नागर को चुनाव में इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। दादरी विधानसभा से बसपा प्रत्याशी सतवीर गुर्जर को भी इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। सतवीर गुर्जर चुनाव जीतने के बाद पांच साल कि क्षेत्र से गायब रहे है। अब चुनाव आने पर क्षेत्र को दौरा कर रहे है।, क्षेत्र से लगातार गायब रहने पर सतवीर गुर्जर को जनसंपर्क के दौरान मतदाताओं के सवालों का दंश झेलना पड़ रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में कुछ मजबूत पार्टी के नेता उनके साथ खड़े लेकिन इस बार उनके साथ नजर नहीं आ रहे है। ऐसे ही विरोध का सामना सपा समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी के समाने देखने को मिल रहे है। पूरे साल कांग्रेस के जो नेता पार्टी के लिए जी जान से जुझे रहे है। जबकि पिछले चुनाव में समीर भाटी हारने के बाद पूरी तरह से क्षेत्र से गायब हो गए। पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। अचानक समीर भाटी को टिकट मिलने से जिले में कांग्रेस संगठन से जुड़े लोग काफी नाराज है, उनका कहना है कि पूरे पांच साल संगठन के लिए जुड़े रहे, जबकि टिकट की बारी आई तो उन्हेें नजर अंदाज कर दिया गया। कांग्रेसियों ने इसका विरोध पार्टी हाईकमान तक किया। उनका विरोध कारगार साबित नहीं है, कांग्रेस संगठन के नेता समीर भाटी के साथ खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, हालांकि समीर भाटी संगठन के नाराज नेताओं को मनाने का प्रयास किया। मनाने के बाद भी कांग्रेस अंदरूनी रूप से पार्टी प्रत्याशी का विरोध कर रहे है। सपा का समर्थन होने के बाद जिले के एक कदावर नेता भी समीर भाटी के साथ खड़े नजर नहीं आ रहे है। ऐसे में समीर भाटी के लिए चुनाव में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ सपा से टिकट कटने के बाद रवींद्र पार्टी भी रालोद से चुनाव मैदान में ताल ठोंक कर और उनके निशाने पर पूरी तरह सपा समर्थित समीर भाटी है। रवींद्र भाटी के साथ युवाओं की बड़ी फौज है। रवींद्र भाटी सपा समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी के राह में रोड़े खड़े रहे है। ऐसा ही जेवर विधानसभा में देखने को मिल रहा है। जहां पर कांग्रेस भाजपा में आए ठाकुर धीरेंद्र सिंह को भी पार्टी के बागी नेताओं के अंदरूनी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा के बागी नेता ठाकुर धीरेंद्र सिंह के खिलाफ बागवत की आवाज बुलदं किए है। जेवर से कांग्रेस समर्थित सपा प्रत्याशी नरेंद्र नागर को इस तरह की समस्या से रूबरू होना पड़ा रहा है।
नरेंद्र सिंह नागर को राज्यसंभा सुरेंद्र सिंह नागर पूरी तरह उनके साथ खड़े है, सपा में नजर अंदाज किए गए सपा के एक बड़े नरेंद्र सिंह नागर का समर्थन करने के बजाय बसपा प्रत्याशी का अंदरूनी रूप से विरोध कर रहे है। सपा के बागी नेता कतई नहीं चाहते है कि नरेंद्र सिंह नागर चुनाव जीते और इसका सेहरा सुरेंद्र सिंह नागर के सिर पर बंधे।
सुरेंद्र नागर व सपा के बड़े बागी नेता के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। सपा प्रत्याशी को हरा कर वह संदेश देना चाहते हैं कि उन्हें नजर अंदाज करने का नतीजा पार्टी को उठाना पड़ा। इसी तरह की कुछ तस्वीर नोएडा विधानसभा सीट की है। जहां पर भाजपा से गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को टिकट मिला। पार्टी के पंकज सिंह का एक कद्दावर नेता के रूप में छवि है। यहां केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा का काफी विरोध है, उन्होंने पार्टी के कई नेताओं को टिकट दिलाने का भरोसा दिला रखा था, इसलिए भाजपा से जुड़े कैप्टन विकास गुप्ता निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में उतर आए है।


