चुनाव के मौके पर समाजवादी सरकार को तगड़ा झटका
हाईकोर्ट ने कृषि तकनीकी सहायक भर्ती परीक्षा 2013 के 6628 पदों की परिणाम सूची रद्द करते हुए नए सिरे से इंटरव्यू कराकर फिर से चयन सूची तैयार करने को कहा है।

रतिभान त्रिपाठी
लखनऊ/इलाहाबाद, 10 फरवरी (देशबन्धु) : सरकारी नौकरियों में धांधली बरतने की समाजवादी सरकार की कारगुजारियां इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसलों से लगातार उजागर हो रही हैं। इससे सरकार में बैठे लोगों की न केवल जातिवादी मानसिकता लोगों के सामने जाहिर हो रही है, वरन प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले अभ्यर्थियों के आरोपों की पुष्टि भी हो रही है। संवैधानिक पदों पर बैठे सियासी लोग कई मौकों पर अपनी बहसों में ऐसे अदालती फैसलों को अतिन्यायिक सक्रियता बताते हुए भले ही इन्हें लोकतंत्र के लिए घातक करार देने से बाज नहीं आते लेकिन आम लोग न्यायपालिका को खूब सराह रहे हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धांधली पर आज एक और फैसला सुनाया है जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार को तगड़ा झटका लगा है।
हाईकोर्ट ने कृषि तकनीकी सहायक भर्ती परीक्षा 2013 के 6628 पदों की परिणाम सूची रद्द करते हुए नए सिरे से इंटरव्यू कराकर फिर से चयन सूची तैयार करने को कहा है।
जाहिर है, चुनाव के मौके पर आए इस फैसले को आधार बनाकर विपक्षी दल सपा सरकार को निशाने पर लेने से नहीं चूकेंगे। इस फैसले ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अभ्यर्थी मनीष उपाध्याय की याचिका पर यह फैसला जस्टिस वी के शुक्ला और जस्टिस एम सी त्रिपाठी की बेंच ने सुनाया है।
अदालत ने कहा है कि चयन सूची में आरक्षण नियमों का उल्लंघन किया गया है। यह किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत का मानना है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का पालन नहीं हुआ। इंटरव्यू में बहुत मनमानी की गई है। इसलिए सरकार उसी परीक्षा के आधार पर चार महीने में फिर से अभ्यर्थियों का इंटरव्यू करे और संविधान के अनुसार व सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत ही आरक्षित पदों का लाभ दे।
याची की ओर से सीनियर एडवोकेट आरके उपाध्याय और एडवोकेट आलोक मिश्रा ने बहस की जबकि सरकार और विभाग की ओर से कमल सिंह यादव और पीएन सक्सेना बहस कर रहे थे।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सरकार में बैठे लोगों ने मनमानी करते हुए 88 प्रतिशत पद आरक्षित वर्ग को आवंटित कर दिए थे जबकि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार यह 50 प्रतिशत से अधिक नहीं आवंटित किए जा सकते। परीक्षा के दौरान मनमाने तरीके से पदों का आवंटन बदला गया था। सामान्य अभ्यर्थियों के हिस्से में केवल 12 प्रतिशत पद ही आए थे। कृषि तकनीकी सहायक अधिकारी के लिए 6628 का चयन किया गया था। इसमें जमकर धांधली का आरोप लगा था।
माना जा रहा है कि भर्ती रद्द होने से करीब 6500 चयनित लोगों को बड़ा नुकसान हुआ है। सरकार में बैठे लोगों की वजह से ऐसी गड़बड़ी हुई है लिहाजा चयनित अभ्यर्थियों का भी उनसे नाराज होना लाजिमी है। ऐसे ही कई और मामलों में मौजूदा सरकार को हाईकोर्ट में मात खानी पड़ी है, जिनकी भर्ती में धांधली की गई थी।


