नाना के घर में नौ साल बाद जलेंगें दीपक
आरुषि की मौत का शोक मनाने का समय तक नहीं मिला। एक मां-बाप को अपने आप को बेकसूर साबित करने के लिए नौ सालों का समय लग गया

नोएडा। आरुषि की मौत का शोक मनाने का समय तक नहीं मिला। एक मां-बाप को अपने आप को बेकसूर साबित करने के लिए नौ सालों का समय लग गया। नौ साल से एक भी त्यौहार नहीं मनाया गया। आलम कभी खुशी कभी गम का है। लेकिन इस बार परिवार के साथ दीपावली का सेलीब्रेशन किया जाएगा। दिए भी जलाए जाएंगे रिश्तेदारों को भी बुलाया जाएगा। बस कमी आरुषि की रहेगी। जलाए जाने वाले दीपकों की चमक ही हमारे दिलों में आरुषि की आहट को हमेशा जगाए रहेगी। बर्शेते अब तक कानून के हाथों से आरुषि के कातिल दूर है इसका गम हमे सताता रहेगा। यह बाते आरुषि के नाना रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन बीडी चिटनेस ने कहीं।
क्या जेल से आने के बाद नुपुर व राजेश नोएडा में रहेंगे या कहीं और
नाना ने बताया कि इतने संघर्ष के बाद शायद ही आरुषि के पिता व माता दोबारा नोएडा आना चाहेंगे। वह यहा नहीं आएंगे। दिल्ली में ही हौजखास स्थित मकान में अपने भाई के साथ रहेंगे। जेल में इतना लंबा सिर्फ समय आरुषि की याद में बिता देना अपने आप में ही एक संघर्ष है। अपने गम को किताबों और कविताओं में लिखना दुख का पहाड़ शायद ही किसी मां-बाप को मिला। न्यायपालिका पर शुरुआत से भरोसा रहा। जिसका परिणाम अब सामने आया। हाइकोर्ट का फैसले का शुक्रिया।
आरुषि का कातिल कौन है उसे कब इंसाफ मिलेगा
यह बात करते ही नाना भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों की सुई सिर्फ नुपुर व राजेश पर ही टिकी रही। लेकिन असली कातिल कौन है। इसके बारे में अब भी किसी को नहीं पता। हू किल्ड आरूषि यह जानना और उसका पकड़ा जाना बेहद जरूरी है। जब तक उसका कातिल पकड़ा नहीं जाता आरूषि का इंसाफ अधूरा ही रहेगा।
नौ सालों तक जांच एजेंसियों व पुलिस ने नुपुर व राजेश को दोषी माना कोई लीगल एक्शन नहीं लेंगे
नोएडा पुलिस व सीबीआई की दोनों ही टीमों ने नुपुर व राजेश तलवार को दोषी माना था। देखिए आरुषि की मौत के बाद उसका शोक मनाने का तक का समय नहीं मिला। इंवेस्टिगेशन, जांच एजेंसियों मीडिया ने इस तरह से उलझाया कि अब हम चैन से रहना चाहते है। हमारा कोई लीगल राइट भी नहीं बनता कि कोई एक्शन लिया जाए। फिलहाल पहले हमारे बच्चे वापस आ जाए इसके बाद ही कुछ सोचा जाएगा।
एक बेटी गई एक वापस आ गई कैसा सोच रहे है आप
नाना ने बताया कि आरुषि की मौत के बाद उनकी बेटी और दामाद को दोषी माना गया। ऐसा लगा मानों मेरा पूरा परिवार ही खत्म हो गया। लेकिन अब एक बेटी वापस आ रही है। आरुषि की कमी को तो पूरा नहीं किया जा सकता। लेकिन परिवार का प्रयास रहेगा कि नुपुर व राजेश को कभी इस बात की कमी महसूस न होने दी जाए।
नोएडा के मकान से आरुषि की यादे जुड़ी है उसका क्या करेंगे
जिस मकान में आरूषि की हत्या हुई वह मकान किराएदारों को दिया गया है। वहां लौटने का मतलब नहीं बनता। मकान बेचा जाए या नहीं इस पर अभी फैसला लेना जल्दबाजी होगी।


