पिछड़ों के बाद बीजेपी की नज़र अब ब्राह्मणों पर
भाजपा नेतृत्व की डा0 महेन्द्र नाथ पाण्डेय के हाथों में उत्तर प्रदेश की बागडोर सौंपकर ब्राह्मणों को साधने की कोशिश मानी जा रही है
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व की डा0 महेन्द्र नाथ पाण्डेय के हाथों में उत्तर प्रदेश की बागडोर सौंपकर ब्राह्मणों को साधने की कोशिश मानी जा रही है।
योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने के बाद एक बड़ा तबका ब्राह्मणों की कथित उपेक्षा का आरोप लगाकर भाजपा के प्रति इस बिरादरी में मुखालफत का माहौल पैदा करने की कोशिश में लग गया था। माना जा रहा है कि इसे देखते हुए नेतृत्व ने राज्य में पार्टी की बागडोर ब्राह्मण नेता को सौंपने की ठानी।
राज्य में करीब 12 फीसदी मतदाता ब्राह्मण हैं। वर्ष 2014 और 2017 के चुनाव में ज्यादातर ब्राह्मण मतदाताओं ने भाजपा को समर्थन दिया था, लेकिन इधर कुछ दिनों से इस जाति के तमाम लोग उपेक्षा का आरोप लगाते हुए भाजपा से खिन्न दिख रहे थे। इनमें ज्यादातर ऐसे थे जिनका मानना था कि क्षत्रिय मुख्यमंत्री बनाकर ब्राह्मणों की उपेक्षा की गयी है।
पाण्डेय को उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाकर पार्टी नेतृत्व ने इस तरह की अटकलों को विराम लगाने की कोशिश की है। पाण्डेय के समक्ष 2019 का चुनाव चुनौती के रुप में है। निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य की अगुवाई में 2017 का विधानसभा चुनाव भाजपा ने लड़ा।
भाजपा को कुल 403 सीटों में से विधानसभा की 312 सीटें हासिल हुई। 13 सीटों पर भाजपा समर्थित अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के उम्मीदवार जीतने में सफल रहे।


