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शादीशुदा छात्राओं से लिया जाता है शपथ पत्र गर्भवती नहीं होंगी

राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद और सरगुजा विश्वविद्यालय के ऑर्डीनेंंस को दरकिनार कर संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय शादीशुदा छात्राओं से दो वर्ष के पाठ्यक्रम के दौरान गर्भवती नहीं होने का शपथ.पत्र लेता ह

शादीशुदा छात्राओं से लिया जाता  है शपथ पत्र गर्भवती नहीं होंगी
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अंबिकापुर। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद और सरगुजा विश्वविद्यालय के ऑर्डीनेंंस को दरकिनार कर संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय शादीशुदा छात्राओं से दो वर्ष के पाठ्यक्रम के दौरान गर्भवती नहीं होने का शपथ.पत्र लेता है। महाविद्यालय 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र में प्रवेशार्थी को बताना होता है कि श्मैं प्रवेश के दौरान गर्भवती नहीं हूं और बीएड अंतिम वर्ष तक गर्भवती नहीं रहूंगी।

छात्राओं द्वारा शपथ पत्र में वचन लिया जाता है कि गर्भवती होने की स्थिति में श्मैं खुद जिम्मेदार रहूंगी। सरगुजा विश्वविद्यालय में पदस्थापना विभाग के ओएसडी डीपीएस तिवारी ने बताया कि संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय का शासी निकाय शपथ पत्र महाविद्यालय संचालन के लिए तैयार किया गया है। सरगुजा विश्वविद्यालय द्वारा कोई भी शपथ पत्र लेने का निर्देश नहीं दिया गया है। एनसीटीई ;राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषदद्ध द्वारा प्रवेश के लिए कोई भी शपथ पत्र जारी नहीं किया जाता है। सरगुजा विश्वविद्यालय द्वारा बीएड पाठ्यक्रम के लिए जारी आर्डीनेंस में भी शपथ पत्र लेने कोई व्यवस्था नहीं है। प्रायोगिक कार्य के लिए छात्र.अध्यापकों की न्यूनतम उपस्थिति 80 फीसदी होगी। स्कूलबद्ध प्रशिक्षण के लिए न्यूनतम उपस्थिति 90 फीसदी होगी।

एनसीटीई ने दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए एक अतिरिक्त वर्ष दिया हुआ है। दो वर्षों में पाठ्यक्रम पूरा नहीं होने की स्थिति में विद्यार्थी को एक वर्ष और मिला है। अनुत्तीर्णए बीमारए विशेष स्थितियों में तीसरे वर्ष की सुविधा मिली है। पाठ्यक्रम के दौरान छात्रा के गर्भवती होने कि स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त एक वर्ष की व्यवस्था दी गयी है।

सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलसचिव बिनोद एक्का ने बताया कि शपथ पत्र विद्यार्थी से लेने का कोई प्रावधान नहीं है। न तो विश्वविद्यालय ने और न ही एनसीटीई ने कोई छात्राओं से शपथ पत्र लेने का निर्देश दिया है। पाठ्यक्रम के दौरान दो वर्ष तक गर्भवती नहीं होने का शपथ पत्र लेने का मामला प्रकाश में आया है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय प्रबंधन को जांच करने को पत्र जारी किया है।
प्रबंधन से मिले जांच के बाद सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। महाविद्यालय संचालन के लिए शासी निकाय है। शासी निकाय को अंधेरे में रख कर शपथ पत्र नहीं लिया जा सकता है।

संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय बीएड प्रथम वर्ष की छात्रा प्रतिमा मिंज का दर्द आंसुओं में छलक गया। प्रतिमा ने बताया कि प्रवेश के दौरान गर्भवती नहीं होने का शपथ पत्र लिया जा रहा था। गर्भवती होने की जानकारी शिक्षिका सुमन पांडेय को बताया तो उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की फार्मेल्टी पूरी करनी होगी। प्रतिमा ने बताया कि महाविद्यालय में विवाहित होने पर यदि प्रतिबंध है तो उसे प्रवेश नहीं दिया जाये। 10 रुपये के स्टाम्प पर शपथ.पत्र लेकर प्रवेश दे दिया गया।

महाविद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधि के नाम पर नृत्य के लिए बाध्य कर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान आठवें माह की गर्भवती थी। इसके बाद भी नृत्य के लिए दबाव बनाया गया। नृत्य के दौरान महिला शिक्षिकाएं हंसी उड़ा रही थीं जबकि छात्र.छात्राओं का सिर शर्म से झुक गया था। प्रतिमा ने बताया कि प्रसव के दौरान मेडिकल लीव ;मातृत्व अवकाशद्ध का पत्र दिया है। प्रसव के बाद कॉलेज लौटने पर बच्चे को फीडिंग कराने के लिए नहीं जाने दिया जाता है। कॉलेज में विद्यार्थियों के आने के बाद ताला लगा दिया जाता है।


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