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भोपाल मेें बच्चों की सेहत को लेकर एडवाइजरी जारी

चीन में बच्चों को हो रहे श्वसन संबंधी बीमारी को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दी है। साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य पर खास ध्यान देने की हिदायतें दी है

भोपाल मेें बच्चों की सेहत को लेकर एडवाइजरी जारी
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भोपाल। चीन में बच्चों को हो रहे श्वसन संबंधी बीमारी को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दी है। साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य पर खास ध्यान देने की हिदायतें दी है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी ने सभी मेडिकल कॉलेजों, शासकीय एवं निजी चिकित्सालयों को निर्देश दिए हैं कि विगत सप्ताहों मे चीन में बच्चों में श्वसन की बीमारी के प्रकरणों में बढोत्तरी के दृष्टिगत एडवाइजरी जारी की गई है। डॉ. तिवारी ने बताया कि वर्तमान में उपलब्ध जानकारी के अनुसार श्वसन संबंधी बीमारियों में वृद्धि मुख्य रूप से बच्चों में हो रही है और यह इन्फ्लूएंजा, माइक्रोप्लाज्मा निमोनिया आदि जैसे सामान्य कारणों से होती है।

एडवाइजरी में निर्देश दिए गए हैं कि सभी जिला अस्पतालों और चयनित टेरिटरी अस्पतालों, एम्स, जिला अस्पतालों, बढ़े टेरिटरी केयर वाले सरकारी, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों सहित निजी अस्पतालों में एसएआरआई प्रकरणों की निगरानी और कोविड-19 के लिए उनका कोविड-19 का परीक्षण कराया जाए।

उन्होंने कहा है कि कोविड-19 के लिए लैब टेस्टिंग का डाटा आईसीएमआर पोर्टल पर अपलोड किया जाए। नियमित निगरानी के लिए आईसीएमआर का डाटा एपीआई के माध्यम से भी उपलब्ध कराया जाए। डाटा का विश्लेषण, परीक्षण पॉजिटिविटी रेट और सिटी वैल्यू यदि संभव हो, के आधार पर किया जाए। समुदाय आधारित निगरानी समुदाय में होने वाली असामान्य घटनाएं जैसे असामान्य प्रकरण, मृत्यु दर, आदि का शीघ्र पता लगाने पर केंद्रित है।

सीएमएचओ डॉ. तिवारी ने कहा कि स्थानीय सरकुलेशन में वायरस लोड का अनुमान प्रदान करें। परियोजना में प्रस्तावित गतिविधियों को एक एकीकृत नेटवर्क के रूप में किया जाएगा। जिससे एक मानक कार्यप्रणाली एवं दोहराव न हो। इस प्रणाली को भविष्य में रोगाणुरोधी प्रतिरोध निगरानी गतिविधियों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है।

इस समय यह पायलट आधार पर है। अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की स्क्रीनिंग अति आवश्यक है। विदेश से आने वाले वायरस और उसके वेरिएंट के प्रवेश का पता लगाने के लिए प्रोटोकॉल का पालन किया जाए। प्रदेश में आने वाली प्रत्येक फ्लाइट में से दो प्रतिशत यात्रियों का आरटी. पीसीआर द्वारा रैंडम स्क्रीनिंग की जाए।


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