अपर आयुक्तों और नगर निवेषक की होगी घर वापसी
भवन निर्माताओं से सांठगांठ कर गलत तरीके से उनके अपूर्ण भवनों को पूर्णता: प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में नगर निगम के दो अपर आयुक्तों और नगर निवेषक को उनके मूल विभाग में वापस पहुंचाया जाएगा

भोपाल। भवन निर्माताओं से सांठगांठ कर गलत तरीके से उनके अपूर्ण भवनों को पूर्णता: प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में नगर निगम के दो अपर आयुक्तों और नगर निवेषक को उनके मूल विभाग में वापस पहुंचाया जाएगा। साथ ही निगम के एक उपयंत्री और दो सहायक यंत्रियों को निलंबित कर दिया गया। वहीं 17 भवनों के पूर्णत: प्रमाण पत्र निरस्त किए गए और 21 पर जुर्माना किया। इस आध्य के प्रस्ताव को नगर निगम परिषद की बैठक में निगम आयुक्त द्वारा जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई अनुसंशा पर पारित किया गया।
दरअसल गत 5 दिसम्बर को आयोजित परिषद की बैठक में कांगे्रस पार्षद गिरीश शर्मा ने जोन क्रमांक 18 और 19 में निगम अफसरों द्वारा कई बिल्डरों से सांठगाठं कर उनके अपूर्ण भवनों को रेरा के दायरे से बचाने के लिए पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने का मामला उठाया था। महापौर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनो जोनो के लिए अलग-अलग जांच समिति गठित की थी। जांच समिति ने कुल 38 भवनों को गलत तरीके से पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करना तथा इसमें निगम के अपर आयुक्त व्हीके चतुर्वेदी, मलिका निगम नागर, नगर निवेषक जीएस सलूजा, उपयंत्री वीएस त्रिपाठी, प्रभारी सहायक यंत्री संजय तिवारी और सहायक यंत्री एके सहानी को दोषी माना।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर निगम आयुक्त प्रियंका दास ने सभ पक्षों की सुनवाई करने के बाद अपना प्रतिवेदन आज निगम परिषद की बैठक में प्रस्तुत किया। इसमें दोनो अपर आयुक्तों और नगर निवेषक को उनके मूल विभाग में भेजने और इनके खिलाफ विभागीय जांच की अनुसंशा राज्य सरकार से करने तथा निगम के तीनों यंत्रियों को निलंबित कर विभागीय जांच की अनुसंशा की गई। वहीं जिन 38 भवनों को पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किए गए उनमें से ज्यादातर काम करने वाले 21 भवन निर्माताओं पर जुर्माना लगाने व नाममात्र काम कर प्रमाण पत्र लेने वाले 17 भवन निर्माताओं के प्रमाण पत्र निरस्त करने का उल्लेख किया गया।
निगम आयुक्त के इस प्रतिवेदन पर परिषद की बैठक में चर्चा उपरांत मंजूरी दे दी गई। हालांकि इस दौरान कांगे्रस के कुछ पार्षदों ने हंगामा भी किया जिसके चलते अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह चौहान को एक मर्तबा बैठक भी स्थगित करनी पड़ी। बाद में कांगे्रस पार्षदों के सुझाव को महापौर आलोक शर्मा ने स्वीकार करते हुए उक्त दोनों जोनों की तरह शहर के अन्य 17 जोनो में जारी किए गए पूर्णता प्रमाण पत्रों की भी जांच कराने की घोषणा की।


