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गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड में शामिल होने का आप ने किया ऐलान

आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड में शामिल होने का ऐलान किया है

गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड में शामिल होने का आप ने किया ऐलान
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चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड में शामिल होने का ऐलान किया है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद भगवंत मान ने आज यहां एक बयान में कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता राज्य के हर गांव से ट्रैक्टर के साथ परेड में शामिल होंगे। पार्टी एक राजनीतिक दल के रूप में नहीं, बल्कि किसान और मजदूर के सेवक के रूप में आंदोलन में शामिल होगी। पार्टी हमेशा से आम लोगों के हितों की आवाज उठाने वाली पार्टी रही है और आगे भी पार्टी किसानों, मजदूरों और गरीब लोगों के संघर्ष में हमेशा साथ रहेगी।

उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा अपने अस्तित्व के लिए किए जा रहे आंदोलन, इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी और योजनाबद्ध एवं शांतिपूर्ण तरीके से किए जाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा आंदोलन बन गया है। यह लड़ाई केवल कानूनों को निरस्त करने के लिए नहीं है, बल्कि देश के लोगों के संविधानिक अधिकारों को बचाने के लिए भी है। शांतिपूर्ण तरीके से ट्रैक्टर मार्च निकालना किसानों का संवैधानिक अधिकार है, जिसे सरकार खत्म करने की कोशिश कर रही है। जिस तरह से केंद्र की मोदी सरकार 2014 के बाद से लोगों के संवैधानिक अधिकारों को कुचल रही है, वह देश के लिए बहुत खतरनाक है।

मान ने कहा कि हिटलर के क्रूर शासन की तरह मोदी सरकार किसान आंदोलन को कुचलने के लिए तमाम तरह के गैरलोकतांत्रिक कदम उठा रही है। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद देश की सार्वजनिक कंपनियों को कॉरपोरेट घरानों के हाथों बेच दिया गया और अब किसानों की जमीन हड़पने के लिए कानून लाकर किसानों को गुलाम बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार लोगों की बात सुनने के बजाय अडानी-अंबानी जैसे कॉर्पोरेटों के लिए काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि पार्टी पहले ही दिन से कृषि कानूनों का विरोध कर रही है। राजनीतिक दल से ऊपर उठकर देश के किसानों के इस संघर्ष का समर्थन करना हमारा प्राथमिक कर्तव्य है, इसीलिए हम किसान आंदोलन का समर्थन करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। किसानों के दुख-दर्द को समझते हुए मोदी सरकार को अपना अडिय़ल रवैया छोड़े और किसानों की मांगों को तुरंत स्वीकार कर तीनों काले कानूनों को तुरंत रद्द करे।


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