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दिशा विधेयक वापस लेना महिलाओं के लिए 'काला दिन', चंद्रबाबू सरकार पर बरसे जगन मोहन रेड्डी

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने राज्य सरकार द्वारा दिशा विधेयक (आंध्र प्रदेश दिशा बिल) वापस लेने के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे राज्य की महिलाओं और बच्चों के लिए "काला दिन" करार दिया है।

दिशा विधेयक वापस लेना महिलाओं के लिए काला दिन, चंद्रबाबू सरकार पर बरसे जगन मोहन रेड्डी
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अमरावती। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने राज्य सरकार द्वारा दिशा विधेयक (आंध्र प्रदेश दिशा बिल) वापस लेने के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे राज्य की महिलाओं और बच्चों के लिए "काला दिन" करार दिया है।

जगन मोहन रेड्डी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए तैयार किए गए व्यापक सुरक्षा तंत्र को राजनीतिक द्वेष के कारण खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वाईएसआरसीपी सरकार ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराध, जांच में देरी और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से दिशा व्यवस्था लागू की थी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में आंध्र प्रदेश दिशा बिल (क्रिमिनल लॉ एपी संशोधन विधेयक, 2019) को वापस लेने का फैसला किया गया। राज्य सरकार के अनुसार, यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसकी समीक्षा के बाद कुछ प्रावधानों पर स्पष्टीकरण मांगा और सुझाव दिया कि मौजूदा विधेयक वापस लेकर केंद्र की सिफारिशों के अनुरूप संशोधित विधेयक पेश किया जाए।

हालांकि, जगन ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि दिशा केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक व्यापक व्यवस्था थी। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के तहत संकट में फंसी महिला मोबाइल पर एसओएस बटन दबाकर या फोन को पांच बार हिलाकर तत्काल पुलिस सहायता प्राप्त कर सकती थी। उनके अनुसार, दिशा ऐप को 1.51 करोड़ से अधिक लोगों ने डाउनलोड किया था और वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल में ऐप के जरिए प्राप्त 31,607 आपातकालीन कॉलों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार ने 18 विशेष दिशा महिला पुलिस थाने स्थापित किए थे। इसके अलावा 13,500 महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती कर प्रत्येक गांव और वार्ड सचिवालय में एक महिला पुलिस अधिकारी उपलब्ध कराई गई थी। महिलाओं की सुरक्षा के लिए 900 दोपहिया और 163 चारपहिया वाहनों के साथ विशेष गश्ती व्यवस्था भी शुरू की गई थी।

उन्होंने कहा कि अपराधों की वैज्ञानिक जांच को मजबूत करने के लिए छह प्रमुख शहरों में फोरेंसिक ढांचे को सुदृढ़ किया गया। साथ ही, त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए 13 विशेष पॉक्सो अदालतें और 12 विशेष महिला अदालतें स्थापित की गईं। यौन अपराधियों का 2,17,467 पंजीकृत आरोपियों का डेटाबेस भी तैयार किया गया था।

जगन मोहन रेड्डी ने दावा किया कि दिशा व्यवस्था के लागू होने के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच की औसत अवधि 2017 के 156 दिनों से घटकर 2022 में 28 दिन रह गई। उन्होंने कहा कि 164 दुष्कर्म मामलों और 378 अन्य यौन अपराधों में सात दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल किए गए, जबकि गंभीर मामलों में 51 प्रतिशत से अधिक आरोपियों को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि मई 2024 तक महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 27 प्रतिशत की कमी आई और मामलों की वार्षिक औसत संख्या 14,338 से घटकर 10,426 रह गई।

जगन ने सवाल उठाया कि यदि सरकार का मानना है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) पर्याप्त है, तो वह दिशा जैसी विशेष व्यवस्था का विकल्प कैसे हो सकती है, जिसमें एसओएस प्रणाली, विशेष महिला थाने, गांव स्तर तक महिला पुलिस नेटवर्क, विशेष गश्ती दल, यौन अपराधियों का डेटाबेस, आधुनिक फोरेंसिक व्यवस्था, विशेष अभियोजन और त्वरित न्याय की व्यवस्था शामिल थी।

वाईएसआरसीपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि दिशा विधेयक वापस लेकर चंद्रबाबू सरकार अपराधियों में कानून का डर कम कर रही है और महिलाओं का सरकार पर भरोसा कमजोर कर रही है। उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल से अपना फैसला वापस लेने और दिशा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की।


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