तिरुपति मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन होगा हाईटेक, ICAI तैयार करेगा पारदर्शी और सुरक्षित सिस्टम
आईसीएआई के अध्यक्ष सीए प्रसन्ना कुमार डी. ने इस परियोजना की पुष्टि करते हुए बताया कि विशेषज्ञों की एक टीम पहले लगभग 100 दिनों तक मंदिर की वर्तमान व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन करेगी।

नई दिल्ली: देश के सबसे अधिक चढ़ावा प्राप्त करने वाले धार्मिक स्थलों में शामिल तिरुमला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) को एक व्यापक चढ़ावा प्रबंधन मॉडल तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस पहल का उद्देश्य मंदिर में आने वाले नकद, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के संग्रह, गिनती, सुरक्षित रखरखाव, बैंक में जमा, लेखांकन, ऑडिट और निगरानी की पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।
100 दिनों तक होगा मौजूदा व्यवस्था का अध्ययन
आईसीएआई के अध्यक्ष सीए प्रसन्ना कुमार डी. ने इस परियोजना की पुष्टि करते हुए बताया कि विशेषज्ञों की एक टीम पहले लगभग 100 दिनों तक मंदिर की वर्तमान व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन करेगी। इस दौरान यह देखा जाएगा कि श्रद्धालुओं से प्राप्त चढ़ावा किस प्रकार संग्रहित किया जाता है, उसकी गिनती कैसे होती है, सुरक्षित भंडारण और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया क्या है तथा लेखा-जोखा और ऑडिट किस प्रकार किए जाते हैं। इस अध्ययन के आधार पर ऐसा मानक प्रबंधन मॉडल तैयार किया जाएगा, जिसे भविष्य में अन्य बड़े मंदिरों की आवश्यकताओं के अनुसार भी अपनाया जा सके।
हर साल हजारों करोड़ का चढ़ावा आता है
तिरुमला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर दुनिया के सबसे समृद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में मंदिर को लगभग 1,365 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ। प्रतिदिन यहां श्रद्धालु करोड़ों रुपये नकद के अलावा सोना, चांदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं भी अर्पित करते हैं। इतनी बड़ी मात्रा में आने वाले दान का सुरक्षित और सटीक प्रबंधन किसी भी संस्था के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती माना जाता है।
पहले भी सामने आ चुके हैं चोरी के मामले
टीटीडी द्वारा यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अतीत में मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कुछ चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2023 में पराकामनी (चढ़ावे की गिनती) के दौरान एक कर्मचारी पर लगभग 900 अमेरिकी डॉलर चोरी करने का आरोप लगा था। इससे पहले वर्ष 2022 में भी चढ़ावे की गिनती के दौरान लगभग 20 हजार रुपये की कथित चोरी का मामला सामने आया था। इन घटनाओं ने चढ़ावा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक मजबूत तथा तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
कैसा होगा नया प्रबंधन मॉडल?
आईसीएआई द्वारा तैयार किए जाने वाले मॉडल का उद्देश्य केवल लेखांकन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही और जोखिम प्रबंधन को भी शामिल किया जाएगा।
प्रस्तावित मॉडल के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
चढ़ावा प्राप्त होने से लेकर बैंक में जमा होने तक प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट और मानकीकृत प्रक्रिया।
नकद, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की अलग-अलग गिनती, वर्गीकरण और रिकॉर्ड तैयार करना।
प्रत्येक चरण पर दोहरी या बहुस्तरीय सत्यापन (Multi-level Verification) ताकि पूरी प्रक्रिया किसी एक व्यक्ति पर निर्भर न रहे।
डिजिटल लेखा-जोखा और सभी रिकॉर्ड का सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक संरक्षण।
सीसीटीवी निगरानी, डिजिटल रिकॉर्डिंग और जहां संभव हो वहां डिजिटल गणना प्रणाली का उपयोग।
गिनती से लेकर बैंक में जमा होने तक हर स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था।
नियमित आंतरिक और बाहरी ऑडिट के माध्यम से रिकॉर्ड का मिलान।
जोखिम प्रबंधन प्रणाली विकसित करना, जिससे किसी भी संभावित अनियमितता की समय रहते पहचान और रोकथाम की जा सके।
क्या अयोध्या के लिए भी बनेगा ऐसा मॉडल?
हाल के दिनों में अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोप भी चर्चा में रहे हैं। इसी संदर्भ में जब आईसीएआई अध्यक्ष से पूछा गया कि क्या संस्था अयोध्या के लिए भी ऐसा कोई मॉडल तैयार करेगी, तो उन्होंने कहा कि अभी तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रस्ताव मिलता है, तो आईसीएआई वहां भी इसी प्रकार की आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने में सहयोग देने के लिए तैयार रहेगा।
देशभर के मंदिरों के लिए बन सकता है मानक मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तिरुपति में यह मॉडल सफलतापूर्वक लागू होता है, तो यह देश के अन्य बड़े मंदिरों के लिए भी एक मानक प्रणाली बन सकता है। आज देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर हर वर्ष करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। ऐसे में आधुनिक तकनीक, डिजिटल रिकॉर्ड, बहुस्तरीय सत्यापन और नियमित ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत कर सकती हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर रहेगा फोकस
टीटीडी और आईसीएआई की यह पहल केवल वित्तीय प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करना भी है। पारदर्शी लेखा प्रणाली, डिजिटल निगरानी और नियमित ऑडिट के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि मंदिर में प्राप्त प्रत्येक दान का सुरक्षित, जिम्मेदार और नियमबद्ध तरीके से प्रबंधन हो। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में देश के अन्य प्रमुख धार्मिक संस्थानों के लिए भी यह एक प्रभावी उदाहरण बन सकता है।


