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पोलावरम परियोजना से विस्थापित परिवारों को 226 करोड़ की सहायता, सीएम नायडू ने सौंपा चेक

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने पोलावरम परियोजना से विस्थापित परिवारों को 226.61 करोड़ रुपए की सहायता राशि का चेक सौंपा

पोलावरम परियोजना से विस्थापित परिवारों को 226 करोड़ की सहायता, सीएम नायडू ने सौंपा चेक
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अमरावती। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को पोलावरम परियोजना से विस्थापित परिवारों को 226.61 करोड़ रुपए की सहायता राशि का चेक सौंपा। यह राशि भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास (आरएंडआर) के तहत तीसरी किस्त के रूप में दी गई।

मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक आवास पर विस्थापित परिवारों से मुलाकात की और तेलुगु नववर्ष उगडी की पूर्व संध्या पर यह राशि प्रदान की। उन्होंने कहा कि पोलावरम परियोजना के लिए अपने घर और जमीन त्यागने वाले लोगों का सरकार सम्मान करती है और उनके बलिदान से ही यह परियोजना साकार हो रही है।

सीएम ने पोलावरम परियोजना को राज्य की “जीवनरेखा” बताते हुए कहा कि इसके पूरा होने और नदी जोड़ परियोजना लागू होने से पूरे राज्य को लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण डायफ्राम वॉल क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसे अब विशेषज्ञों की सलाह से 1000 करोड़ रुपए की लागत से दोबारा बनाया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि डायफ्राम वॉल का काम एक सप्ताह में पूरा हो जाएगा और परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले 21 महीनों में काम में तेजी आई है और अगले वर्ष उगादी के दो महीने बाद तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह केंद्र सरकार की परियोजना होने के बावजूद राज्य सरकार इसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि मुआवजा भुगतान में तेजी गठबंधन सरकार के आने के बाद ही आई है।

सरकार अब तक तीन किस्तों में कुल 1,943 करोड़ रुपए की राशि 26,149 विस्थापितों को दे चुकी है। इसमें जनवरी 2025 में संक्रांति पर 800 करोड़ रुपए, दिवाली पर 916 करोड़ रुपए और अब उगडी पर 226.6 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।

परियोजना के तहत पहले चरण में 38,068 विस्थापितों के पुनर्वास की योजना है। कुल 75 पुनर्वास कॉलोनियों में से 26 पूरी हो चुकी हैं, जबकि 49 निर्माणाधीन हैं। 2022 में चिन्हित 17,114 विस्थापितों के लिए भी कॉलोनियां बनाई जा रही हैं, जिनका लक्ष्य अप्रैल 2027 तक पूरा करना है।

प्रत्येक परिवार को घर बनाने के लिए 3.5 लाख रुपए और भूखंड के लिए 2 लाख रुपए दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण परियोजना 6-7 साल तक लटकी रही।


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