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आंध्र प्रदेश में 5 लाख महिलाओं को उद्यमी बनाने का लक्ष्य: सीएम चंद्रबाबू नायडू

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को घोषणा की कि राज्य सरकार ने पांच लाख महिलाओं को उद्यमी बनाने का लक्ष्य तय किया है।

आंध्र प्रदेश में 5 लाख महिलाओं को उद्यमी बनाने का लक्ष्य: सीएम चंद्रबाबू नायडू
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अमरावती। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को घोषणा की कि राज्य सरकार ने पांच लाख महिलाओं को उद्यमी बनाने का लक्ष्य तय किया है।

उन्होंने बताया कि इस दिशा में तेजी से काम करते हुए एक साल के भीतर ही एक लाख महिलाओं को उद्यमी बनाया जा चुका है और जल्द ही आंध्र प्रदेश में छह लाख महिला उद्यमी होंगी, जो देश में सबसे अधिक होंगी।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अमरावती परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि हर घर से एक लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमयू) स्थापित हो और उनमें से कम से कम 50 प्रतिशत का नेतृत्व महिलाओं द्वारा किया जाए।

इस अवसर पर उन्होंने स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने के लिए ‘स्वयं एपी’ लोगो का अनावरण भी किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पांच उत्कृष्ट महिला उद्यमियों को सम्मानित किया और विभिन्न क्षेत्रों की 6,81,506 महिलाओं को लाभान्वित करने वाले रियायती ऋणों के रूप में 10,100 करोड़ रुपये का चेक भी प्रदान किया।

उन्होंने महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिलाएं अपनी मेहनत, प्रेम और त्याग के लिए जानी जाती हैं और समाज तथा परिवार को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश के मंत्रिमंडल में तीन महिला मंत्री सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक आदिवासी महिला हैं और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण हर वर्ष प्रभावी ढंग से राष्ट्रीय बजट प्रस्तुत करती हैं।

उन्होंने कहा, “असल में महिलाएं ही असली वित्त मंत्री होती हैं, क्योंकि वे घरेलू आय का समझदारी से प्रबंधन करती हैं और सुनिश्चित करती हैं कि हर रुपया सही तरीके से खर्च हो।”

चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि महिलाओं के लिए न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में पहला बड़ा कदम एनटी रामाराव ने उठाया था। उन्होंने महिलाओं को समान संपत्ति अधिकार दिए, महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पद्मावती विश्वविद्यालय की स्थापना की और स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आठ प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने कॉलेजों और नौकरियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था और उम्मीद जताई कि जल्द ही विधानसभाओं में भी 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि उनके द्वारा स्थापित डीडब्ल्यूसीआरए और एमईपीएमए जैसी व्यवस्थाएं आज पूरे देश के लिए आदर्श बन चुकी हैं। हालांकि समय-समय पर इन संस्थानों को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन वे मजबूत बनी हुई हैं।

नायडू ने 1995 से 2004 के बीच अविभाजित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया था।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि गठबंधन सरकार ने ‘स्त्री शक्ति’ योजना के तहत महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा शुरू की है। उन्होंने कहा कि ‘स्वयं’ ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने की जिम्मेदारी वे स्वयं लेंगे, ताकि स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सके।

अपने संबोधन में उन्होंने संयुक्त परिवार प्रणाली को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि छोटे-मोटे विवादों के कारण परिवारों को टूटना नहीं चाहिए।

उन्होंने कहा कि राशन, पेंशन या आवास भत्तों जैसी सुविधाओं के लिए परिवारों को अलग नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे समाज की संरचना कमजोर होती है। उन्होंने चिंता जताई कि आज कई बुजुर्ग माता-पिता अकेले रह जाते हैं, जबकि देश में बुजुर्ग आबादी लगातार बढ़ रही है और इस स्थिति में बदलाव लाने की जरूरत है।


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