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95 साल की उम्र में भारतीय नागरिक बनकर अंतिम सांस लेना चाहती हैं आंध्र प्रदेश की महिला

94 वर्षीय के महालक्ष्मम्मा की जिंदगी की अब केवल एक ही अंतिम इच्छा है कि वह भारतीय नागरिक के रूप में अपनी अंतिम सांस लेना चाहती हैं

95 साल की उम्र में भारतीय नागरिक बनकर अंतिम सांस लेना चाहती हैं आंध्र प्रदेश की महिला
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अमरावती। 94 वर्षीय के महालक्ष्मम्मा की जिंदगी की अब केवल एक ही अंतिम इच्छा है कि वह भारतीय नागरिक के रूप में अपनी अंतिम सांस लेना चाहती हैं। आंध्र प्रदेश के बापटला जिले के एक गांव की रहने वाली महालक्ष्मम्मा ने इसी इच्छा को पूरा करने के लिए अपनी अमेरिकी नागरिकता त्याग दी और भारत की नागरिकता दोबारा हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

करीब दो दशक तक अमेरिका में रहने के बाद वह कुछ वर्ष पहले अपने पैतृक गांव लौट आई थीं। अब उन्होंने भारतीय नागरिकता बहाल किए जाने का अनुरोध किया है ताकि जीवन के अंतिम दिन अपने गांव में बिता सकें।

बापटला के जिला कलेक्टर वी. विनोद कुमार के समक्ष महालक्ष्मम्मा ने भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली। शपथ के दौरान उन्होंने भावुक होकर तेलुगु में कहा, "कलेक्टर गरु, मेरी उम्र अब 95 साल होने वाली है। मैं भारतीय नागरिक के रूप में मरना चाहती हूं।"

इस भावुक पल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। गंभीर श्रवण समस्या और अंग्रेजी न समझ पाने के कारण शपथ का तेलुगु में अनुवाद किया गया। उनके बेटे ने तेलुगु में शपथ पढ़कर सुनाई, जिसे महालक्ष्मम्मा ने जिला कलेक्टर के सामने दोहराया। इसके साथ ही नागरिकता अधिनियम के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई।

जिला कलेक्टर के अनुसार, महालक्ष्मम्मा ने 1 जून को भारतीय नागरिकता बहाल करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। उन्होंने राज्य सचिवालय से भी नागरिकता बहाली की अपील की थी। मंगलवार को जिला प्रशासन ने उनके आवेदन की जांच शुरू की।

चिंतागुम्पाला गांव की रहने वाली महालक्ष्मम्मा अपने पति नागभूषणम के निधन के बाद अपने बेटे डॉ. कोंड्रुगुंटा के. पिच्चैया के पास अमेरिका चली गई थीं। उनके बेटे पेशे से ऑन्कोलॉजिस्ट हैं। महालक्ष्मम्मा ने 27 जुलाई 2000 को अमेरिकी नागरिकता ग्रहण की थी और लगभग 20 वर्षों तक वहां रहने के बाद वर्ष 2018 में परिवार सहित भारत लौट आई थीं।

वर्तमान में उनके बेटे गुंटूर स्थित एनआरआई मेडिकल कॉलेज के निदेशक हैं और पूरा परिवार अपने पैतृक गांव में रह रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, महालक्ष्मम्मा चाहती हैं कि उनके जीवन के अंतिम दिन उनके गांव में बीतें और अंतिम संस्कार भी वहीं किया जाए।

शपथ ग्रहण के बाद जिला कलेक्टर ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर फाइल राज्य सचिवालय भेज दी है। वहां से इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा, जो भारतीय नागरिकता बहाल करने पर अंतिम निर्णय लेगा।

इस बीच, महालक्ष्मम्मा की इच्छा पर प्रतिक्रिया देते हुए तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के राज्यसभा सांसद सना सतीश बाबू ने इसे "बेहद भावुक और प्रेरणादायक" बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि किसी भी पासपोर्ट या डॉलर से अपनी मातृभूमि और जड़ों का रिश्ता बड़ा नहीं हो सकता।

वहीं, आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने कहा कि महालक्ष्मम्मा का फैसला हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है और यह मातृभूमि के प्रति प्रेम का सशक्त संदेश देता है।


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