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नारी शक्ति वंदन बिल पर सियासत तेज, सर्बानंद सोनोवाल का कांग्रेस पर हमला

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कांग्रेस और उसके इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये दल नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक, 2026 का विरोध कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।

नारी शक्ति वंदन बिल पर सियासत तेज, सर्बानंद सोनोवाल का कांग्रेस पर हमला
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डिब्रूगढ़। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बुधवार को कांग्रेस और उसके इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये दल नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक, 2026 का विरोध कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।

सोनोवाल ने डिब्रूगढ़ में भाजपा जिला कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रस्तावित विधेयक का विरोध देश की राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं को उनका उचित और पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्धता की कमी को दर्शाता है। इसका उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है।

उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके समर्थक इस विधेयक का विरोध करने वाली ताकतों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे और जनमत जुटाएंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों, गरिमा और शासन में समान भागीदारी के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

सोनोवाल ने कहा कि यह विधेयक सभी स्तरों पर निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं को उनका उचित हिस्सा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। देश के समग्र और समावेशी विकास के लिए महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी आवश्यक है।

डिब्रूगढ़ के सांसद ने कहा कि केंद्र द्वारा हाल ही में पेश किए गए इस कानून को व्यापक और द्विदलीय समर्थन मिलने की उम्मीद थी, क्योंकि लैंगिक समानता और समावेशी शासन को बढ़ावा देने में इसका बहुत महत्व है। हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा अपनाए गए रुख पर निराशा व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि देश की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग आधी है, फिर भी विधायी निकायों में उनका प्रतिनिधित्व केवल 15-16 प्रतिशत तक ही सीमित है। यह असंतुलन न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि अस्थिर भी है और इसे ठोस नीतिगत उपायों के माध्यम से ठीक करने की आवश्यकता है।

सोनोवाल ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कई दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी विभिन्न संस्थाओं में महिलाओं के लिए पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए कोई निर्णायक और निरंतर कदम उठाने में विफल रही है। इसके विपरीत, उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भाजपा-नीत एनडीए सरकार का महिलाओं पर केंद्रित नीतियों पर जोर देने की बात को उजागर किया।

उन्होंने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', 'प्रधानमंत्री जन धन योजना', 'उज्ज्वला योजना' और 'स्वच्छ भारत मिशन' जैसी प्रमुख योजनाओं का जिक्र किया और बताया कि इन पहलों ने महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और वित्तीय सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सोनोवाल ने कहा कि महिलाओं को केवल कल्याणकारी योजनाओं की लाभार्थी बनकर ही नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें शासन, नीति-निर्माण और राष्ट्र-निर्माण में एक अग्रणी और सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल महिलाओं के अधिकारों और प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाए गए कदमों का विरोध कर रहे हैं, उन्हें आने वाले समय में पूरे देश की महिलाओं से एक मजबूत और निर्णायक जवाब मिलने की संभावना है।


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