नामरूप यूरिया प्लांट 2028 तक पूरा होने की राह पर: सीएम हिमंता बिस्वा सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि पूर्वी असम में लंबे समय से लंबित नामरूप यूरिया प्लांट प्रोजेक्ट अब सही रास्ते पर है और इसके 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह राज्य के औद्योगिक और कृषि विकास में एक बड़ी उपलब्धि होगी।

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि पूर्वी असम में लंबे समय से लंबित नामरूप यूरिया प्लांट प्रोजेक्ट अब सही रास्ते पर है और इसके 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह राज्य के औद्योगिक और कृषि विकास में एक बड़ी उपलब्धि होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 11,000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से बन रहे प्रस्तावित फर्टिलाइजर प्लांट का काम दशकों तक रुका रहा, लेकिन मौजूदा सरकार के तहत इसे नई गति मिली है।
सरमा ने कहा कि इतनी लंबी देरी की एक मुख्य वजह कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के समय बनी यह धारणा थी कि प्रोजेक्ट की जगह अंतरराष्ट्रीय सीमा के बहुत करीब थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाके के लिए रणनीतिक रूप से अहम होने के बावजूद जगह को लेकर चिंताओं की वजह से इस बड़े प्रोजेक्ट का काम सालों तक रुका रहा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी, जिससे लंबे समय से प्रतीक्षित फर्टिलाइजर यूनिट पर काम शुरू करने का रास्ता साफ हो गया।
उम्मीद है कि नामरूप प्रोजेक्ट से देश में यूरिया का उत्पादन काफी बढ़ेगा और देश के दूसरे हिस्सों से खाद की सप्लाई पर निर्भरता कम होगी। अधिकारियों का मानना है कि यह प्लांट असम और पूरे नॉर्थ-ईस्ट इलाके के किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा।
इस प्रस्तावित यूनिट से डिब्रूगढ़ जिले और आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है।
इस प्रोजेक्ट को केंद्र की उस व्यापक रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मकसद औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और खाद उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
नामरूप में पहले से ही बड़े फर्टिलाइजर प्लांट मौजूद हैं और इसे लंबे समय से असम के अहम औद्योगिक केंद्रों में से एक माना जाता रहा है। उम्मीद है कि नया प्लांट इस विरासत को आगे बढ़ाएगा और साथ ही इसमें आधुनिक टेक्नोलॉजी और बेहतर प्रोडक्शन क्षमताएं भी शामिल होंगी।
राज्य सरकार के अधिकारियों ने बार-बार इस प्रोजेक्ट को एक क्रांतिकारी पहल बताया है, जो कृषि विकास में मदद करेगा, खाद की उपलब्धता बेहतर करेगा और असम तथा पूर्वोत्तर के आर्थिक विकास में योगदान देगा।


